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Gorakhpur News: 24 एकादशियों का फल देती है निर्जला एकादशी
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आज व्रत रख श्रद्धालु विधि-विधान से करेंगे भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भगवान विष्णु की उपासना का पर्व निर्जला एकादशी बुधवार को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रखने से श्रद्धालुओं को वर्ष के सभी एकादशियों का फल मिल जाता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल भी न पीने का विधान होने के कारण इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, इस दिन व्रतियों को यथाशक्ति दान करना चाहिए। जल कलश का दान करने वाले श्रद्धालुओं को वर्ष भर की एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस व्रत से अन्य एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाता है और संपूर्ण एकादशियों के पुण्य का लाभ भी मिलता है।
निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है। एकादशी के दिन सुबह भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और कथा सुनें। जल से कलश भरे और उसे सफेद वस्त्र से ढककर रखें। उस पर चीनी और दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भगवान विष्णु की उपासना का पर्व निर्जला एकादशी बुधवार को मनाई जाएगी। ऐसा माना जाता है कि सिर्फ निर्जला एकादशी का व्रत रखने से श्रद्धालुओं को वर्ष के सभी एकादशियों का फल मिल जाता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहते हैं। इस व्रत में सूर्योदय से द्वादशी के सूर्योदय तक जल भी न पीने का विधान होने के कारण इसे निर्जला एकादशी कहते हैं।
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार, इस दिन व्रतियों को यथाशक्ति दान करना चाहिए। जल कलश का दान करने वाले श्रद्धालुओं को वर्ष भर की एकादशियों का फल प्राप्त होता है। इस व्रत से अन्य एकादशियों पर अन्न खाने का दोष छूट जाता है और संपूर्ण एकादशियों के पुण्य का लाभ भी मिलता है।
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निर्जला एकादशी व्रत की पूजा विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस व्रत में एकादशी तिथि के सूर्योदय से अगले दिन द्वादशी तिथि के सूर्योदय तक जल और भोजन ग्रहण नहीं किया जाता है। एकादशी के दिन सुबह भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। इसके बाद ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें और कथा सुनें। जल से कलश भरे और उसे सफेद वस्त्र से ढककर रखें। उस पर चीनी और दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दान दें।
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