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Gorakhpur News: गोरखपुर में खुला नया मध्यस्थता केंद्र, 32 नए मध्यस्थों की तैनाती
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गोरखपुर। अदालतों में लंबित मुकदमों का बोझ कम करने और विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए जनपद न्यायालय में नया मध्यस्थता केंद्र खोला गया है। जिला जज राज कुमार सिंह ने मंगलवार को केंद्र का लोकार्पण किया। इसके साथ ही 32 नए मध्यस्थों की तैनाती की गई है। अब जिले में मध्यस्थों की कुल संख्या बढ़कर 42 हो गई है।
पहले जिले में केवल 10 मध्यस्थ थे, जिनके जिम्मे 1850 मामले थे। मध्यस्थों की संख्या बढ़ने से अब समझौते योग्य मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। इससे पक्षकारों को लंबी अदालती प्रक्रिया से राहत मिलेगी और न्यायालयों का समय भी बचेगा। जिला जज राज कुमार सिंह ने कहा कि मध्यस्थता विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रभावी माध्यम है। इसमें दोनों पक्षों की सहमति से साझा समाधान निकाला जाता है।
इससे अदालती कार्यवाही की जटिलताओं से बचने के साथ ही समय और संसाधनों की भी बचत होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मीनाक्षी सिन्हा ने कहा कि नए मध्यस्थों की तैनाती से अधिक मामलों को मध्यस्थता के जरिये निस्तारित करने में मदद मिलेगी। इससे सुलह के माध्यम से वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
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इस अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी राजेश त्रिपाठी, वाणिज्यिक न्यायालय के पीठासीन अधिकारी राम प्यारे सरोज, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, अधिवक्ता और जनपद न्यायालय के अन्य न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
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पहले जिले में केवल 10 मध्यस्थ थे, जिनके जिम्मे 1850 मामले थे। मध्यस्थों की संख्या बढ़ने से अब समझौते योग्य मामलों के निस्तारण में तेजी आने की उम्मीद है। इससे पक्षकारों को लंबी अदालती प्रक्रिया से राहत मिलेगी और न्यायालयों का समय भी बचेगा। जिला जज राज कुमार सिंह ने कहा कि मध्यस्थता विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाने का प्रभावी माध्यम है। इसमें दोनों पक्षों की सहमति से साझा समाधान निकाला जाता है।
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इससे अदालती कार्यवाही की जटिलताओं से बचने के साथ ही समय और संसाधनों की भी बचत होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव मीनाक्षी सिन्हा ने कहा कि नए मध्यस्थों की तैनाती से अधिक मामलों को मध्यस्थता के जरिये निस्तारित करने में मदद मिलेगी। इससे सुलह के माध्यम से वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
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इस अवसर पर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के पीठासीन अधिकारी राजेश त्रिपाठी, वाणिज्यिक न्यायालय के पीठासीन अधिकारी राम प्यारे सरोज, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, अधिवक्ता और जनपद न्यायालय के अन्य न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।