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नेपाल के नए नक्शे को लेकर पहाड़ में जश्न तो तराई में चिंता, मधेशी नेताओं ने भारत से मेलजोल बढ़ाने पर दे रहे जोर

Sat, 20 Jun 2020 05:26 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Sat, 20 Jun 2020 05:26 PM IST
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Nepali people celebrate after new map of nepal
Indo nepal border - फोटो : अमर उजाला।

नेपाल के मानचित्र में बदलाव को लेकर संसद में पेश संविधान संशोधन विधेयक पर कानून बन जाने के बाद नेपाल के पहाड़ी समुदाय में जश्न तो मदेशी समुदाय चिंतित है। मधेशी समुदाय ने पिछले दिनों मानचित्र को लेकर संसद में संशोधन बिल पर सवाल खड़ा किया था।

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उनका कहना है कि कोई भी बात या तथ्य प्रमाणिकता के आधार पर होनी चाहिए। लिपुलेख, कालापानी व लिपियाधुरा मुद्दे पर भारत के खिलाफ जाना ठीक नहीं है। आपस में मिल बैठकर वर्षो पुरानी दोस्ती को देखते हुए समस्या का हल निकाला जाना चाहिए था। नेपाल सरकार को इसपर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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राष्ट्रीय जनता पार्टी रूपनदेही जिलाध्यझ अजय वर्मा ने बताया कि मानचित्र को संशोधन करने के बाद इतनी जल्द बाजी में उस पर कानून पारित करना यह चिंता का विषय है। सरकार को इसपर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। सरकार की नीति ठीक नहीं है। नेपाल का मदेशी समुदाय चिंतित है। आगे सरकार का रूख क्या होगा, यह देखना है।
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नए नक्शे को लेकर खड़े किए सवाल

रूपनदेही जिले के मर्चवार क्षेत्र से कांग्रेसी विधायक अष्टभुजा पाठक ने कुछ दिन पूर्व नए नक्शे के औचित्य पर ही सवाल खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा कि हम सरकार से पूछ रहे हैं कि पुराने नक्शे में क्या कमी थी, जिसे बदलने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पेश करना पड़ा। नया मानचित्र जारी करने का रहस्य क्या है। हम लोगों का भारत संबंधो में खटास आ सकती है।

मर्चवार क्षेत्र के वरिष्ठ मधेशी नेता असलम खान ने कहा है कि नेपाल का नक्शा दोनों देशों की रिश्तों की डोर कमजोर कर रहा है। नेपाल के मर्चवार क्षेत्र से सीमावर्ती भारतीय क्षेत्रो में हर एक परिवार की रिस्तेदारी है। भारत को हम लोग बड़ा भाई मानते हैं। हम लोगों का यही प्रयास होगा कि नेपाल सरकार मधेशियों के हित को देखते हुए कोई फैसला ले।

कम्यूनिस्ट पार्टी के प्रदेश कमेटी सदस्य और पूर्व मंत्री गुलजारी यादव ने बताया कि राष्ट्रपति की मंजूरी मिलना नेपाल का यह आंतरिक मामला है। वार्ता के माध्यम से इस समस्या का समाधान होगा। इससे भारत और नेपाल के रिश्ते खराब नहीं बल्कि आने वाले समय मे और मजबूत होंगे।
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