{"_id":"5ebc26d88ebc3e90ad2905c7","slug":"needle-stuck-in-babys-eye-treatment-in-brd190","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोरखपुर: बच्ची की आंख में धसी सुई, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गोरखपुर: बच्ची की आंख में धसी सुई, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती
Thu, 14 May 2020 01:57 PM IST
अमर उजाला लोकल ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 01:57 PM IST
विज्ञापन
BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महाराजगंज के घुघली के रहने वाली चार साल की मासूम अंशु के आंख में बच्चों के साथ खेलते समय सुई धंस गई। घाव उसके कार्निया तक पहुंच गया है। मंगलवार को परिजन उसे इलाज के लिए शहर लेकर आएं थे और नेत्र रोग विशेषज्ञों के दो प्राइवेट अस्पतालों से संपर्क किया। लेकिन दोनों अस्पतालों के डॉक्टरों ने लॉकडाउन का हवाला देकर इलाज करने से मना कर दिया।
परिजन आईएमए के अध्यक्ष डॉ एससी कौशिक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. इमरान अख्तर से संपर्क किया। निजी अस्पतालों में जांच न होने पर परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज गए। जहां डॉक्टरों ने मासूम को दवा दी। एक सप्ताह बाद उसे फिर से बुलाया गया है।
नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ राम कुमार जायसवाल नव बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। पता कराया जाएगा की बच्ची का ऑपरेशन करना होगा या नहीं। वहीं नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के कारण नेत्र रोग विशेषज्ञ को किसी भी प्रकार के इलाज करने पर रोक है। हम इमरजेंसी भी नहीं चला सकते। जबकि आंखों के गंभीर मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं।
विज्ञापन
प्रशासन ने जो नियम बनाए हैं। वह कुछ समस्याओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाए हैं। आंखों के मामले में इलाज न मिलने पर रोशनी जाने का खतरा होता है। नेत्र रोग विशेषज्ञों को इमरजेंसी करने की अनुमति मिलनी चाहिए। देर होने पर मासूम के आंखों की रोशनी छिन सकती है। डॉ.एससी कौशिक, अध्यक्ष, आईएमए
विज्ञापन
परिजन आईएमए के अध्यक्ष डॉ एससी कौशिक और हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. इमरान अख्तर से संपर्क किया। निजी अस्पतालों में जांच न होने पर परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज गए। जहां डॉक्टरों ने मासूम को दवा दी। एक सप्ताह बाद उसे फिर से बुलाया गया है।
विज्ञापन
नेत्र रोग विभाग के एचओडी डॉ राम कुमार जायसवाल नव बताया कि मामले की जानकारी नहीं है। पता कराया जाएगा की बच्ची का ऑपरेशन करना होगा या नहीं। वहीं नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. वाई सिंह ने कहा कि लॉकडाउन के कारण नेत्र रोग विशेषज्ञ को किसी भी प्रकार के इलाज करने पर रोक है। हम इमरजेंसी भी नहीं चला सकते। जबकि आंखों के गंभीर मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं।
विज्ञापन
प्रशासन ने जो नियम बनाए हैं। वह कुछ समस्याओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाए हैं। आंखों के मामले में इलाज न मिलने पर रोशनी जाने का खतरा होता है। नेत्र रोग विशेषज्ञों को इमरजेंसी करने की अनुमति मिलनी चाहिए। देर होने पर मासूम के आंखों की रोशनी छिन सकती है। डॉ.एससी कौशिक, अध्यक्ष, आईएमए