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कुशीनगर: एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने बहुत ढूंढा नहीं मिला बालक, चार दिन पहले गंडक नदी में था डूबा
Fri, 23 Jul 2021 03:44 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
अमर उजाला नेटवर्क, कुशीनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 23 Jul 2021 03:44 PM IST
सार
सोमवार को दिन में लगभग 11 बजे गंडक नदी के किनारे गया था, जहां पैर फिसल जाने के कारण गंडक नदी में गिर गया था। इसका पता चलने के बाद पहले तो पुलिस फिर एसडीआरएफ और गुरुवार से एनडीआरएफ की टीम उस बालक की तलाश कर रही है।
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गंडल में बालक की तलाश करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
कुशीनगर जिले के जवही दयाल गांव के निकट गंडक नदी में डूबे बालक की एनडीआरएफ और एसडीआरएफ टीम ने शुक्रवार को भी काफी तलाश की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। उसकी तलाश चार दिन से चल रही है। अब परिवारवालों की रही-सही उम्मीद भी टूटने लगी है।
जवही दयाल गांव का निवासी 12 वर्षीय अनुज चौधरी पिछले सोमवार को दिन में लगभग 11 बजे गंडक नदी के किनारे गया था, जहां पैर फिसल जाने के कारण गंडक नदी में गिर गया था। इसका पता चलने के बाद पहले तो पुलिस फिर एसडीआरएफ और गुरुवार से एनडीआरएफ की टीम उस बालक की तलाश कर रही है।
शुक्रवार को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने अनुज की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका पता नहीं चला। एनडीआरएफ के कमांडर एसआई विक्रम सिंह और एसडीआरएफ के कमांडर ओंकार यादव की अगुवाई में इनकी टीमें बालक की खोजबीन में लगी रही। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा में भी काफी दूर तक तलाश हुई, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इस वजह से बालक के परिवार में शोक का वातावरण छा गया है।
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बालक के पिता गिरेश चौधरी, उसकी मां, बड़ा भाई और तीनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी रोती बिलखती सुनी आंखें आज भी अपने अनुज को खोज रही हैं। ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, शैलेंद्र चौधरी, पप्पू सिंह, रितेश चौधरी, बृजकिशोर साहनी, प्रदीप गुप्ता आदि का कहना है कि नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक लगभग बीस किलोमीटर लंबे क्षेत्र में गंडक नदी बहती है और हर साल दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। फिर भी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इस तरह की दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाए जाने के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए।
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जवही दयाल गांव का निवासी 12 वर्षीय अनुज चौधरी पिछले सोमवार को दिन में लगभग 11 बजे गंडक नदी के किनारे गया था, जहां पैर फिसल जाने के कारण गंडक नदी में गिर गया था। इसका पता चलने के बाद पहले तो पुलिस फिर एसडीआरएफ और गुरुवार से एनडीआरएफ की टीम उस बालक की तलाश कर रही है।
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शुक्रवार को एनडीआरएफ और एसडीआरएफ ने अनुज की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका पता नहीं चला। एनडीआरएफ के कमांडर एसआई विक्रम सिंह और एसडीआरएफ के कमांडर ओंकार यादव की अगुवाई में इनकी टीमें बालक की खोजबीन में लगी रही। उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा में भी काफी दूर तक तलाश हुई, लेकिन कुछ पता नहीं चला। इस वजह से बालक के परिवार में शोक का वातावरण छा गया है।
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बालक के पिता गिरेश चौधरी, उसकी मां, बड़ा भाई और तीनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी रोती बिलखती सुनी आंखें आज भी अपने अनुज को खोज रही हैं। ग्राम प्रधान दिनेश जायसवाल, शैलेंद्र चौधरी, पप्पू सिंह, रितेश चौधरी, बृजकिशोर साहनी, प्रदीप गुप्ता आदि का कहना है कि नरवाजोत से लगायत अहिरौलीदान तक लगभग बीस किलोमीटर लंबे क्षेत्र में गंडक नदी बहती है और हर साल दुर्घटनाएं भी होती रहती हैं। फिर भी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इस तरह की दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाए जाने के लिए सुरक्षा के इंतजाम किए जाने चाहिए।