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नजूल अध्यादेश: पट्टेदार हैरान-परेशान..सीलिंग दफ्तर वाले ताला डालकर सरके

Wed, 13 Mar 2024 03:23 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 Mar 2024 03:23 AM IST
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Nazul Ordinance: The lessees are shocked and worried...the sealing office people locked it and moved away.
पट्टेदार बोले- बहुत झोल हैं, देखिए किसकी जमीन बचती है और कौन होगा बेदखल
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तीन साल से था सन्नाटा, नजूल की जमीन के दस्तावेज लेने वालों की बढ़ी भीड़


- मंगलवार को दोपहर बाद कार्यालय में लटका था ताला, कर्मचारी चले गए







अमर उजाला ब्यूरो



गोरखपुर। नजूल अध्यादेश-2024 के लागू होने के बाद नजूल की जमीनों पर काबिज लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। बहुत सारे लोग 50-60 साल पुराने कागजात लेकर कलक्ट्रेट स्थित सीलिंग दफ्तर पहुंचने लगे हैं। मंगलवार को लोगों की आवाजाही बढ़ी तो कर्मचारी दफ्तर में ताला लगाकर चले गए।



उधर, अधिवक्ताओं के चैंबर पर भी इस समय नजूल जमीन को लेकर सरगर्मी है। हर जगह एक ही चर्चा है कि दस्तावेजों में बहुत झोल है... देखिए किसकी जमीन बचती है और कौन बेदखल होता है। मंगलवार दोपहर करीब दो बजे अधिवक्ता व्यंकटेश्वर नाथ तिवारी के चैंबर पर पांच-छह लोग बैठे थे। तभी दो लोग नजूल की जमीनों के कागजात लेकर पहुंचे। वे इसकी नकल निकलवाना चाहते थे।
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इसी बीच एक अधिवक्ता ने कहा- सुना है कि आधा गोलघर भी नजूल की जमीन है। इस पर दूसरे शख्स ने कहा कि अब तो सभी यही कहते फिर रहे हैं कि उनकी नजूल की जमीन शाश्वत पट्टे पर है। बस अध्यादेश आने दीजिए, सबकी हकीकत सामने आ जाएगी। सिलिंग दफ्तर में कागजात की जानकारी करने गए अधिवक्ता राजेश शर्मा का कहना था कि वर्ष 2020 में नजूल की जमीन पर पट्टा बंद कर दिया गया तो इसके बाद इस दफ्तर में सन्नाटा पसरा रहता था लेकिन, अब अचानक भीड़ बढ़ गई है। देखिए, कार्यालय पर ताला लगा है। मेरे पास भी दो लोग कागजात लेकर आए थे। उन्हें अध्यादेश आने का इंतजार करने को कहा गया है।
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परत दर परत खुल रही कलई



नजूल की जमीनों पर पट्टा समाप्त होने के बाद भी काबिज लोगों की कलई खुलने रही है। कलक्ट्रेट में पुराने दस्तावेज लेकर अधिवक्ता के पास आए एक शख्स पुराने दस्तावेज लेखक से समझने के बाद टाइपिंग करवा रहे थे। इस बीच अधिवक्ता राजेश शर्मा पहुंच गए। नजूल की जमीनों को लेकर ही चर्चा छिड़ी तो चुटकी लेते हुए बोले, जो लोग अपनी विरासत बता रहे थे और फ्री होल्ड कराने का दावा करते थे आज वहीं लोग मारे-मारे फिर रहे हैं। वहां मौजूद, सुशील पांडेय ने कहा कि वैसे अच्छा ही हुआ नई नजूल नीति आई है। जितने भी रसूखदार थे उन्होंने ही नजूल की जमीनों का पट्टा कराया है। कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जिनका काम ही यही था। कौड़ियों के भाव जमीन पट्टे पर करा ली और फ्री होल्ड कराकर करोड़ों मुनाफा कमाया। कम से कम यह खेल तो रुकेगा।
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