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Gorakhpur News: नौसड़ लूटकांडः दरोगा समेत तीन निलंबित पुलिस कर्मियों का रोका गया वेतन

Fri, 05 Sep 2025 01:49 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Sep 2025 01:49 AM IST
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Nausad robbery case: Salary of three suspended police personnel including the inspector stopped
राजस्थान के युवक से लूट का मामला, पुलिस लाइंस में आमद कराई और न ही नोटिस का दिया जवाब
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गोरखपुर। बेलीपार इलाके के नौसड़ में राजस्थान से आए युवक संग लूट की घटना में जांच के दायरे में आए चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव समेत तीन पुलिस कर्मियों का वेतन रोक दिया गया है। दरअसल, पिछले एक माह से तीनों निलंबित पुलिसकर्मियों ने न तो पुलिस लाइंस में आमद कराई और न ही विभागीय नोटिस का ही जवाब दिया है।



बीते नौ अगस्त को बेलीपार इलाके में पिछौरा के रहने वाले (वर्तमान में राजस्थान में रहते हैं) रविशंकर को कार सवारों ने अगवा कर 90 हजार रुपये लूट लिए थे। मामले में अगले दिन बदमाशों ने चार लाख रुपये लेकर फिर से बुलाया था। पीड़ित ने इसकी शिकायत एसपी सिटी अभिनव त्यागी से की थी। इसके बाद मामले में राजघाट थाने में अज्ञात पर केस दर्ज कर लिया गया।
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लूट करने वालों ने खुद को पुलिस के क्राइम ब्रांच का बताया था और उसी दिन चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव समेत तीन पुलिस वालों को निलंबित कर दिया गया था। इसके बाद से तीनों पुलिस कर्मी लगातार गैरहाजिर चल रहे हैं।
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एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि लूटकांड की घटना के बाद तीनों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर पुलिस लाइंस में हाजिरी देने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद वे उपस्थित नहीं हुए। न ही नोटिस मिलने के बाद कोई स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया। विभाग ने इसको गंभीरता से लेते हुए पहले उनके खिलाफ गैरहाजिरी की रिपोर्ट दर्ज कराई और फिर उनके गृह जनपद स्थित आवास पर नोटिस भेजा। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब तीनों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई और न ही वे पुलिस लाइंस पहुंचे तो विभाग ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोकने का निर्णय लिया। पुलिस विभाग के सूत्रों के मुताबिक, यदि निलंबित पुलिस कर्मियों ने जल्द हाजिरी नहीं दी तो उनकी सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई की जा सकती है। विभाग इस प्रकरण को गंभीर अनुशासनात्मक उल्लंघन मानते हुए नियमों के अनुसार सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।




मेडिकल का सत्यापन करने मध्य प्रदेश पहुंची पुलिस की टीम



लूटकांड के बाद पता चला कि तीनों पुलिस कर्मी बिना अनुमति के किशोरी को बरामद करने का तथ्य जीडी में अंकित करते हुए मुंबई चले गए। इधर संदेह के घेरे में आने के बाद एसएसपी राज करन नय्यर ने तीनों को निलंबित कर जांच बैठा दी थी। इसके बाद से तीनों ने पुलिस लाइंस में आमद नहीं कराई। बीच-बीच में तीनों पुलिस कर्मियों ने खुद के बीमार होने का हवाला देते हुए 12 अगस्त से 22 अगस्त का मेडिकल भेज दिया था। एसपी सिटी अभिनव त्यागी का कहना है कि मेडिकल बनाने वाले इंदौर निवासी डॉ. अशोक श्रीवास्तव के पास सत्यापन के लिए पुलिस की एक टीम भेजी गई है। मेडिकल गलत पाया गया तो पुलिस कर्मियों के खिलाफ झूठा दस्तावेज देने के आरोप में 14 (1) के तहत दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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