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Gorakhpur News: भारतीय दर्शन के साथ शोध कर नाथपंथ को बढ़ा सकते हैं आगे
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि दर्शन के लिए शोधपीठ से अच्छी जगह नहीं हो सकती। नाथ पंथ को भारतीय दर्शन के साथ शोध करके आगे बढ़ाया जा सकता है।
वह विश्व दर्शन दिवस पर भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से डीडीयू के श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि शोधपीठ को दर्शनशास्त्र, हिंदी, संस्कृत एवं इतिहास विभाग के साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है।
मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय के डॉ. अनूप पति तिवारी ने कहा कि भारत का दर्शन किस रूप में विज्ञान है यह समझना हो तो हमें भारत के योग की तरफ जाना होगा। दूसरे वक्ता इंदिरा गांधी जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. गोविंद प्रसाद मिश्र ने कहा कि नाथ पंथ में सभी दर्शनों का सार भी है तथा कुछ नयापन भी है। इसमें शास्त्र गौण है और अनुभव प्रधान है। नाथपंथ का उद्देश्य व्यावहारिक है। संचालन डॉ. सोनल सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने किया। इस अवसर पर विभिन्न सत्र भी आयोजित किए गए।
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वह विश्व दर्शन दिवस पर भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के सहयोग से डीडीयू के श्रीगोरक्षनाथ शोधपीठ में शनिवार को आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर कार्यक्रम अध्यक्ष संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि शोधपीठ को दर्शनशास्त्र, हिंदी, संस्कृत एवं इतिहास विभाग के साथ मिलकर कार्य करने की जरूरत है।
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मुख्य वक्ता मगध विश्वविद्यालय के डॉ. अनूप पति तिवारी ने कहा कि भारत का दर्शन किस रूप में विज्ञान है यह समझना हो तो हमें भारत के योग की तरफ जाना होगा। दूसरे वक्ता इंदिरा गांधी जनजातीय केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. गोविंद प्रसाद मिश्र ने कहा कि नाथ पंथ में सभी दर्शनों का सार भी है तथा कुछ नयापन भी है। इसमें शास्त्र गौण है और अनुभव प्रधान है। नाथपंथ का उद्देश्य व्यावहारिक है। संचालन डॉ. सोनल सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने किया। इस अवसर पर विभिन्न सत्र भी आयोजित किए गए।
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