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राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस: आपको भी होना होगा जिम्मेदार, जानिए कैसे रोक सकते हैं प्रदूषण

Thu, 02 Dec 2021 11:39 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 02 Dec 2021 11:39 AM IST
सार

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एक सर्वे के अनुसार गोरखपुर में वायु प्रदूषण एक बड़ा कारक वाहनों से निकलने वाला धुआं है। 40 फीसदी तक वायु प्रदूषण वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह से होता है।

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National Pollution Control Day Special story news in Gorakhpur
गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर में जहरीली हो रही हवा को बेहतर करने की जितनी जिम्मेदार शासन-प्रशासन की है, उतनी ही हमारी और आपकी भी है। इस संकट से सामूहिक प्रयास से ही छुटकारा पाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, छोटे-छोटे कदम वातावरण को प्रदूषित होने से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।

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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के शिक्षक प्रो. गोविंद पांडेय बताते हैं, केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के साथ मिलकर एमएमएमयूटी की छात्रा प्रज्ञा सिंह और सुरभि शुक्ला ने शोध किया। उसमें इस बात की पुष्टि हुई कि रेड लाइट पर गाड़ियों के स्टार्ट रखने से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा प्रदूषण होता है। ऐसे में ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को बेहतर करने के साथ लोगों को भी रेड लाइट होने पर इंजन बंद करने की आदत डालनी होगी।

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करीब 40 फीसदी वायु प्रदूषण वाहनों से निकलने वाले धुएं से

मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के एक सर्वे के अनुसार गोरखपुर में वायु प्रदूषण एक बड़ा कारक वाहनों से निकलने वाला धुआं है। 40 फीसदी तक वायु प्रदूषण वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह से होता है।

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खड़ी गाड़ी का इंजन स्टार्ट रखने से होता है ज्यादा प्रदूषण

ट्रैफिक लाइट रेड होने पर अधिकांश लोग अपने गाड़ियों का इंजन स्टार्ट रखते हैं। एक शोध के मुताबिक इंजन स्टार्ट रहने पर चलती गाड़ियों की तुलना में खड़ी गाड़ियों से निकलने वाले धुएं से वातावरण ज्यादा प्रदूषित होता है।


 

वाहनों का धुआं पहुंचाता है ज्यादा नुकसान

10 माइक्रोन से ज्यादा बड़े साइज वाले कण नाक के बालों से रूक कर फेफड़े तक नहीं पहुंच पाते हैं। जबकि, इनसे छोटे कण सीधे हमारे फेफड़े तक पहुंच जाते हैं। वाहनों से निकलने वाले धुएं के कण 10 माइक्रोन से कम साइज के होते हैं जो हमारे स्वास्थ्य के लिए काफी होते हैं।

इन बिंदुओं पर काम करने की आवश्यकता

  • कंस्ट्रक्शन साइट पर बिल्डिंग मटेरियल को ढक कर रखा जाए।
  • समय समय पर पानी का छिड़काव किया जाए।
  • ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
  • लाल बत्ती पर गाड़ियों का इंजन बंद किया जाए।
  • चौराहों पर लगे फव्वारों को लगातार चलाया जाए।
  • पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (पीयूसी) सर्टिफिकेट जारी करते हुए गाड़ियों के इंजन को ट्यून किया जाए।
  • गाड़ियों का पॉल्यूशन नियमित अंतराल पर हो ।
  • औद्योगिक क्षेत्रों में लगे प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों की लगातार जांच की जाए।
  • औद्योगिक क्षेत्रों में पौधरोपण एवं वनीकरण को बढ़ावा दिया जाए।
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