{"_id":"6605dff171498b7e400a167c","slug":"national-charter-will-be-made-to-control-dengue-emphasis-will-be-on-increasing-public-participation-gorakhpur-news-c-7-hsr1010-509572-2024-03-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gorakhpur News: डेंगू पर नियंत्रण के लिए बनेगा राष्ट्रीय चार्टर, जन भागीदारी बढ़ाने पर जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gorakhpur News: डेंगू पर नियंत्रण के लिए बनेगा राष्ट्रीय चार्टर, जन भागीदारी बढ़ाने पर जोर
विज्ञापन
गोरखपुर। डेंगू पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्तर का चार्टर बनेगा। मई में नई दिल्ली में डेंगू संबंधित प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्यक्रम में यह चार्टर प्रमुख भूमिका निभाएगा। इसके लिए क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आरएमआरसी) और स्वयंसेवी संस्था ड्रग्स फॉर नेगलेक्टेड डिजीज इनीशिएटिव (डीएनडीआई) ने डेंगू के विशेषज्ञों, समुदाय और आम लोगों से जानकारी जुटाने के लिए चरगांवा ब्लॉक सभागार में बृहस्पतिवार को डेंगू जनजागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया। सामुदायिक भागीदारी, सबकी जिम्मेदारी विषय पर आयोजित इस कार्यशाला में बीमारी, बचाव और सामुदायिक भूमिका के बारे में विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में गोरखपुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. नरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक पखवाड़े के दौरान मच्छरों के स्रोतों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने पर विशेष जोर है। आरएमआरसी के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया और कहा कि डेंगू की समय से पहचान और उपचार जरूरी है। आरएमआरसी के पूर्व निदेशक डॉ. रजनीकांत ने कहा कि डेंगू का सिर्फ लाक्षणिक उपचार संभव है, इसीलिए बीमारी की जल्द पहचान जरूरी होती है। नेशनल वेक्टर वॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के पूर्व निदेशक डॉ. पीके श्रीवास्तव ने डेंगू के कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
वेक्टर बोर्न विशेषज्ञ डॉ. बीएन नागपाल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजकिशोर सिंह, मंडलीय किट विज्ञानी डॉ. वीके श्रीवास्तव, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह, सहायक जिला मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे आदि ने भी बीमारी से जुड़े पहलुओं पर अपनी बात रखी।
विज्ञापन
विज्ञापन
कार्यक्रम में गोरखपुर मंडल के अपर निदेशक स्वास्थ्य डॉ. नरेंद्र प्रसाद गुप्ता ने कहा कि विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान और दस्तक पखवाड़े के दौरान मच्छरों के स्रोतों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने पर विशेष जोर है। आरएमआरसी के निदेशक डॉ. कृष्णा पांडेय ने सामुदायिक सहभागिता पर जोर दिया और कहा कि डेंगू की समय से पहचान और उपचार जरूरी है। आरएमआरसी के पूर्व निदेशक डॉ. रजनीकांत ने कहा कि डेंगू का सिर्फ लाक्षणिक उपचार संभव है, इसीलिए बीमारी की जल्द पहचान जरूरी होती है। नेशनल वेक्टर वॉर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के पूर्व निदेशक डॉ. पीके श्रीवास्तव ने डेंगू के कारण और बचाव के उपायों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
विज्ञापन
वेक्टर बोर्न विशेषज्ञ डॉ. बीएन नागपाल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ. राजकिशोर सिंह, मंडलीय किट विज्ञानी डॉ. वीके श्रीवास्तव, जिला मलेरिया अधिकारी अंगद सिंह, सहायक जिला मलेरिया अधिकारी राजेश चौबे आदि ने भी बीमारी से जुड़े पहलुओं पर अपनी बात रखी।
विज्ञापन