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Gorakhpur News: पांच साल पहले हुई थी हत्या, नहीं मिला सुराग... बंद हो गई फाइल
Fri, 17 May 2024 03:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Fri, 17 May 2024 03:44 AM IST
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कैंट इलाके के भैरोपुर में रात में सोते समय हुई थी रंजीत की हत्या
भाई ने पिता और दो चाचा के खिलाफ दर्ज करवाया था केस
थाने के साथ क्राइम ब्रांच की टीम ने विवेचना के बाद लगा दी फाइनल रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। कैंट इलाके के भैरोपुर में पांच साल पहले रात में सोते समय गोली मारकर हुई रंजीत की हत्या आज भी पहले बनी हुई है। पुलिस ने घर में मौजूद भाई संजीव की तहरीर पर पिता और दो चाचा के खिलाफ केस दर्ज किया था। कैंट पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच की टीम ने भी जांच की, लेकिन हाथ खाली रहने पर चार साल पहले ही एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई। बाद में वादी की मांग पर दोबारा जांच की गई। फिर भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। इस मामले में कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर दोबारा एफआर लगा दी गई।
बता दें कि 22 अगस्त 2019 की रात करीब एक बजे दवा विक्रेता रंजीत की घर में ही कुछ लोगों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। रंजीत अविवाहित था और पिता से जमीन के झगड़े को लेकर अलग रहता था। रात में उसके साथ छोटा भाई संजीव बगल कमरे में सो रहा था। रात में उसने पुलिस को सूचना देकर रंजीत को घायलावस्था में मेडिकल कॉलेज ले गया। जहां से उसे लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ जाने से पहले ही अगले दिन उसकी मौत हो गई।
संजीव ने पिता राधेश्याम, चाचा रम्भू व राजकुमार उर्फ बबलू के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया। इस मामले शुरुआती एक साल कैंट पुलिस जांच करती रही, साक्ष्य के अभाव में पुलिस ने एफआर लगा दिया।
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संजीव ने दुबारा जांच शुरू कराई तो क्राइम ब्रांच जांच में जुट गई, लेकिन हत्या की पहली सुलझी नहीं। पुलिस का प्रथम शक वादी पर था, जबकि वादी का आरोप था कि नामजद आरोपियों से पुलिस पूछताछ ही नहीं कर रही। इस मामले में पूर्व की एसपी क्राइम इंदू प्रभा मौके पर जांच भी की थीं, लेकिन कोई साक्ष्य हाथ नहीं लगा।
वर्तमान में क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को विवेचना मिली थी। साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्होंने एफआर लगाकर रिपोर्ट एसपी क्राइम को सौंप दी है। विवेचक ने इस मामले में वादी संजीव से स्टांप पेपर पर भी इस बार लिखवा लिया है कि वह जांच से संतुष्ट है।
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कोर्ट ने दोनों पक्ष का नार्काे टेस्ट का दिया था आदेश
क्राइम ब्रांच ने विवेचना के दौरान साक्ष्य नहीं मिलने पर वादी और प्रतिवादी का नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी थी, जिसपर कोर्ट ने भी नार्को टेस्ट का आदेश दे दिया, लेकिन दोनों पक्ष जांच कराने नहीं पहुंचा।
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ये भी केस नहीं खुले
खोराबार में बलराम हत्याकांड का खुलासा चार साल बाद नहीं हो सका।
दो साल पूर्व बांसगांव में हुई बच्चे की हत्या का राज बरकरार।
पिपराइच में सिर काटकर किशोर की हत्या का खुलासा नहीं हो सका।
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भाई ने पिता और दो चाचा के खिलाफ दर्ज करवाया था केस
थाने के साथ क्राइम ब्रांच की टीम ने विवेचना के बाद लगा दी फाइनल रिपोर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। कैंट इलाके के भैरोपुर में पांच साल पहले रात में सोते समय गोली मारकर हुई रंजीत की हत्या आज भी पहले बनी हुई है। पुलिस ने घर में मौजूद भाई संजीव की तहरीर पर पिता और दो चाचा के खिलाफ केस दर्ज किया था। कैंट पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच की टीम ने भी जांच की, लेकिन हाथ खाली रहने पर चार साल पहले ही एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी गई। बाद में वादी की मांग पर दोबारा जांच की गई। फिर भी पुलिस किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची। इस मामले में कोई साक्ष्य नहीं मिलने पर दोबारा एफआर लगा दी गई।
बता दें कि 22 अगस्त 2019 की रात करीब एक बजे दवा विक्रेता रंजीत की घर में ही कुछ लोगों ने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी थी। रंजीत अविवाहित था और पिता से जमीन के झगड़े को लेकर अलग रहता था। रात में उसके साथ छोटा भाई संजीव बगल कमरे में सो रहा था। रात में उसने पुलिस को सूचना देकर रंजीत को घायलावस्था में मेडिकल कॉलेज ले गया। जहां से उसे लखनऊ रेफर कर दिया। लखनऊ जाने से पहले ही अगले दिन उसकी मौत हो गई।
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संजीव ने पिता राधेश्याम, चाचा रम्भू व राजकुमार उर्फ बबलू के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कराया। इस मामले शुरुआती एक साल कैंट पुलिस जांच करती रही, साक्ष्य के अभाव में पुलिस ने एफआर लगा दिया।
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संजीव ने दुबारा जांच शुरू कराई तो क्राइम ब्रांच जांच में जुट गई, लेकिन हत्या की पहली सुलझी नहीं। पुलिस का प्रथम शक वादी पर था, जबकि वादी का आरोप था कि नामजद आरोपियों से पुलिस पूछताछ ही नहीं कर रही। इस मामले में पूर्व की एसपी क्राइम इंदू प्रभा मौके पर जांच भी की थीं, लेकिन कोई साक्ष्य हाथ नहीं लगा।
वर्तमान में क्राइम ब्रांच के एक इंस्पेक्टर को विवेचना मिली थी। साक्ष्य नहीं मिलने पर उन्होंने एफआर लगाकर रिपोर्ट एसपी क्राइम को सौंप दी है। विवेचक ने इस मामले में वादी संजीव से स्टांप पेपर पर भी इस बार लिखवा लिया है कि वह जांच से संतुष्ट है।
कोर्ट ने दोनों पक्ष का नार्काे टेस्ट का दिया था आदेश
क्राइम ब्रांच ने विवेचना के दौरान साक्ष्य नहीं मिलने पर वादी और प्रतिवादी का नार्को टेस्ट की अनुमति मांगी थी, जिसपर कोर्ट ने भी नार्को टेस्ट का आदेश दे दिया, लेकिन दोनों पक्ष जांच कराने नहीं पहुंचा।
ये भी केस नहीं खुले
खोराबार में बलराम हत्याकांड का खुलासा चार साल बाद नहीं हो सका।
दो साल पूर्व बांसगांव में हुई बच्चे की हत्या का राज बरकरार।
पिपराइच में सिर काटकर किशोर की हत्या का खुलासा नहीं हो सका।