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Gorakhpur News: गोड़धोइया नाले में मिट्टी का खेल, ठेकेदार-जमीन मालिक की सेटिंग में सिस्टम फेल

Mon, 17 Jun 2024 11:52 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Mon, 17 Jun 2024 11:52 AM IST
सार

बशारतपुर के राजनगर के रहने वाले लोगों ने शनिवार रात में डीएम से मुलाकात कर समस्याओं के समाधान का आग्रह किया। प्रभावित मकानों के मुआवजे की बात के अलावा जल निकासी पर भी चर्चा हुई। मोहल्लावासी राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि नाला निर्माण की गति बहुत धीमी है, इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है। रंजीत सिंह ने बताया कि उनके मकान के पास नाला का घुमावदार क्षेत्र है।

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Mud game in Godhoiya drain, system fails in contractor-landowner setting in Gorakhpur
गोड धोइया नाले से निकली मिट्टी से भर रहे प्लाटिंग का गड्ढा - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

गोड़धोइया नाला निर्माण में ठेकेदार और कुछ जमीन मालिक सेटिंग कर मिट्टी का खेल कर रहे हैं। बरसात होने पर जल निकासी के लिए हो रहे नाला सफाई के दौरान निकाली जा रही मिट्टी को नाला के किनारे डालने की बजाय 60-70 मीटर दूर ले जाकर खाली प्लाटों में डाला जा रहा है। इससे नाला के आसपास के लोगों की चिंता बढ़ गई। बरसात में नाला उफनाया तो उनकी मुसीबत बढ़ सकती है।
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गोड़धोइया नाला निर्माण के दौरान धर्मपुर क्षेत्र के सहयोग विहार कॉलोनी की पुलिया के पास नाले की सफाई चल रही है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि पहले यह बताया गया था कि नाले के किनारे स्थित जिन मकानों की नींव के पास से मिट्टी हट गई है, वहां मिट्टी डालकर मकान को सुरक्षा दी जाएगी, लेकिन ठेकेदार ने उन लोगों से सांठगांठ कर ली है, जिनके प्लॉट अभी खाली हैं और वहां मिट्टी डाली जानी है।
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Mud game in Godhoiya drain, system fails in contractor-landowner setting in Gorakhpur
नाले की मिट्टी से दूसरे की जमीन पाटने का खेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नाले से निकाली गई मिट्टी को 60-70 मीटर दूर के खाली प्लॉटों में डालकर मशीनों से बराबर कराया जा रहा है। जिस किनारे की सतह ऊंची है, उधर भी मिट्टी डाली जा रही है, जबकि दूसरी ओर नीचे होने के बावजूद वहां मिट्टी नहीं डाली जा रही है। इससे उन लोगों की चिंता बढ़ गई जिनके मकानों का कुछ हिस्सा नाला निर्माण के दौरान तोड़ा गया था।

गोड़धोइया नाला क्षेत्र के 400 लोगों के व्हाट्सएप ग्रुप में शनिवार रात 12 बजे ठेकेदार और जमीन मालिक की सेटिंग का वीडियो वायरल हुआ। इस मामले में अब स्थानीय लोग मंथन कर रहे हैं कि नाले की मिट्टी किनारे नहीं डाले जाने के कारण बरसात में नाला उफनाया तो कॉलोनियों के घरों में पानी जा सकता है।

डीएम तक पहुंची बात, नहीं लगाईं मिट्टी भरी बोरियां
बशारतपुर के राजनगर के रहने वाले लोगों ने शनिवार रात में डीएम से मुलाकात कर समस्याओं के समाधान का आग्रह किया। प्रभावित मकानों के मुआवजे की बात के अलावा जल निकासी पर भी चर्चा हुई। मोहल्लावासी राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि नाला निर्माण की गति बहुत धीमी है, इसमें तेजी लाने की आवश्यकता है।

रंजीत सिंह ने बताया कि उनके मकान के पास नाला का घुमावदार क्षेत्र है। जल निगम के अधिकारियों ने प्रभावित लोगों से वादा किया था कि संवेदनशील स्थानों पर मिट्टी की बोरियां डाली जाएंगी, लेकिन नूतन श्रीवास्तव और वीरेंद्र पांडेय के मकान के पास मिट्टी भरी बोरियां डालने का काम नहीं हुआ, जबकि व्यास मुनि सिंह ने बताया कि उन्होंने नाला के हिस्से में अपने मकान का जो हिस्सा गया था, उसे तोड़वा लिया, लेकिन उनके मकान की नींव पर मिट्टी नहीं डाली जा रही है। डीएम ने आश्वासन दिया है कि बचाव के कार्य कराए जाएंगे।
 
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नाले की मिट्टी से दूसरे की जमीन पाटने का खेल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बरसात में जल निकासी की हो रही वैकल्पिक व्यवस्था
जल निगम ने गोड़धोइया नाला निर्माण क्षेत्र में जल निकासी के लिए तीन क्यूआरटी बनाई है। इसमें एक टीम में एक जेसीबी, एक ट्रैक्टर-ट्राॅली एवं 10 श्रमिक, एक जेई और एक सुपरवाइजर रहेंगे। मौके पर छह पंप हैं, जबकि तीन कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं।

निर्माण के बाद फिर मकान में रहने की मांगी अनुमति
गोड़धोइया नाला निर्माण में राजस्व विभाग एवं जल निगम ने 14 लोगों को नोटिस दिया है कि वे अपने मकान की रजिस्ट्री प्रशासन के पक्ष में कर दें और बरसात में क्षतिग्रस्त मकान में न रहे। बशातरपुर में बरसात से पहले ही राजेश श्रीवास्तव के मकान में दरार आ गई तो जलनिगम ने गर्डर लगाकर सुरक्षात्मक उपाय किया।

उसके बाद नाले के किनारे अन्य दो-तीन मंजिला मकानों को बचाने के लिए गर्डर लगाया है जिसे बाद में भी हटाने की योजना नहीं है। वहीं बशारतपुर राजनगर के लोगों ने डीएम को ज्ञापन सौंपकर मकानों की रजिस्ट्री की शर्त बदलने की मांग की है।

इन लोगों की मांग है कि गोड़धोइया नाला निर्माण के समाप्ति तिथि 31 मार्च 2025 तक मकान खाली रखेंगे और उसके बाद पुन: मकान में रहेंगे। भवन स्वामी को अनुग्रह राशि की जगह क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए, भवन स्वामी के अवशेष मकान पर किसी सरकारी, गैर सरकारी संस्था का वर्तमान व भविष्य में कब्जा, दखल नहीं रहेगा। भवन स्वामियों के साथ किसी प्रकार का अन्याय न हो। ज्ञापन सौंपने वालों में राजेश श्रीवास्तव, चंद्रजीत सिंह, वीरेंद्र पांडेय सहित अन्य लोग शामिल थे।

जल निगम के अधीक्षण अभियंता रतन सेन सिंह ने बताया कि गोड़धोइया नाला निर्माण में जहां लोगों ने टूटे हुए मकानों का मलबा डाला था, उसमें से अधिकतम मलबा हटाने के साथ सफाई की जा रही है। यदि नाले की मिट्टी किनारे डालने के बजाए दूर किसी निजी व्यक्ति के जमीन में डाली जा रही है तो इसकी जांच की जाएगी।
 
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