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Gorakhpur News: संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा निर्जल व्रत
Sat, 07 Oct 2023 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 07 Oct 2023 01:03 AM IST
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- श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया जीवित पुत्रिका व्रत
- व्रती महिलाएं संतान को गले में जिउतिया पहनाकर करेंगी व्रत का पारण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। जीवित पुत्रिका व्रत (जिउतिया) का पर्व शुक्रवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। संतान की दीर्घायु की कामना के साथ माताओं ने निर्जल व्रत रखा। दोपहर बाद माताओं ने संतान की समृद्धि और आरोग्य के मनोरथ के साथ बरियार (पौधे) की पूजा की। निर्जला उपवास में ही माताओं ने सायंकाल राजा जीवमूतवाहन और राजा परीक्षित की कथा सुनी। माताएं शनिवार को अपने और संतान के गले में जिउतिया पहनाने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
शुक्रवार को व्रत का दिन होने के चलते घरों में साफ-सफाई का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया। माताओं ने सूर्य उगने से पूर्व सरगही खाकर जल ग्रहण किया फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया। निर्जल व्रत रख दोपहर बाद चिचिहड़ा का दातून कर स्नान किया और उसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। माताएं बरियार के पौधे के पास पहुंचीं और उसे सिंदूर से टीकने के बाद उसमें जल अर्पित किया। समूह में बैठकर व्रत के महात्म्य की कथाएं सुनीं।
कोट
मेरे तीन बेटियां और एक बेटा है। संतान की लंबी आयु और मंगलकामना के साथ हर साल जिउतिया व्रत को विधि विधान के साथ रखती हूं।
- संध्या शुक्ला, कृष्णा नगर
मैंने संतान की प्राप्ति के लिए इस व्रत को मन्नत मांग कर उठाया था। भगवान की कृपा से मनोकामना पूरी हुई। हर साल निष्ठा के साथ व्रत रखती हूं।
- अलका, बशारतपुर
पुत्र की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत के साथ जीवमूतवाहन और राजा परीक्षित की कथा सुनी। बेटे के गले में जिउतिया बांधने के बाद व्रत का पारण करूंगी।
- उषा देवी, पादरी बाजार
जीवित पुत्रिका व्रत की बहुत मान्यता है। पहले सास व्रत को रखती थीं, अब मैं अपने संतान की लंबी आयु और उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हूं।
- शालिनी, जाफरा बाजार
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- व्रती महिलाएं संतान को गले में जिउतिया पहनाकर करेंगी व्रत का पारण
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। जीवित पुत्रिका व्रत (जिउतिया) का पर्व शुक्रवार को श्रद्धा के साथ मनाया गया। संतान की दीर्घायु की कामना के साथ माताओं ने निर्जल व्रत रखा। दोपहर बाद माताओं ने संतान की समृद्धि और आरोग्य के मनोरथ के साथ बरियार (पौधे) की पूजा की। निर्जला उपवास में ही माताओं ने सायंकाल राजा जीवमूतवाहन और राजा परीक्षित की कथा सुनी। माताएं शनिवार को अपने और संतान के गले में जिउतिया पहनाने के बाद व्रत का पारण करेंगी।
शुक्रवार को व्रत का दिन होने के चलते घरों में साफ-सफाई का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया। माताओं ने सूर्य उगने से पूर्व सरगही खाकर जल ग्रहण किया फिर पूरे दिन निर्जला व्रत रखने का संकल्प लिया। निर्जल व्रत रख दोपहर बाद चिचिहड़ा का दातून कर स्नान किया और उसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। माताएं बरियार के पौधे के पास पहुंचीं और उसे सिंदूर से टीकने के बाद उसमें जल अर्पित किया। समूह में बैठकर व्रत के महात्म्य की कथाएं सुनीं।
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कोट
मेरे तीन बेटियां और एक बेटा है। संतान की लंबी आयु और मंगलकामना के साथ हर साल जिउतिया व्रत को विधि विधान के साथ रखती हूं।
- संध्या शुक्ला, कृष्णा नगर
मैंने संतान की प्राप्ति के लिए इस व्रत को मन्नत मांग कर उठाया था। भगवान की कृपा से मनोकामना पूरी हुई। हर साल निष्ठा के साथ व्रत रखती हूं।
- अलका, बशारतपुर
पुत्र की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत के साथ जीवमूतवाहन और राजा परीक्षित की कथा सुनी। बेटे के गले में जिउतिया बांधने के बाद व्रत का पारण करूंगी।
- उषा देवी, पादरी बाजार
जीवित पुत्रिका व्रत की बहुत मान्यता है। पहले सास व्रत को रखती थीं, अब मैं अपने संतान की लंबी आयु और उज्ज्वल भविष्य के लिए व्रत रखती हूं।
- शालिनी, जाफरा बाजार