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उत्पाती बंदर आया शिकंजे में: गांव वालों ने चंदा जुटाया, 'मंकी कैचर' बुलाया- 15 हजार रुपये किए खुद से खर्च

Tue, 22 Oct 2024 11:21 AM IST
रोहित सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Tue, 22 Oct 2024 11:21 AM IST
सार

गांव वालों ने ही 15 हजार रुपये चंदा करके मंकी कैचर को बुलाया था। बंदर को बोरे में भरकर कुसम्ही जंगल में छोड़ दिया गया। उसी के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। बंदरों ने गांव के पांच लोगों को काटकर घायल कर दिया था।

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Monkey catcher was called to control monkey menace in Gorakhpur, 15 thousand rupees were spent on villagers
मंकी कैचर बंदर के पकड़ने के बाद - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

खोराबार इलाके के लहसड़ी गांव में पिछले कुछ दिनों से उत्पात मचा रहे बंदर को सोमवार को ग्रामीणों ने मंकी कैचर की मदद से पकड़ लिया। गांव वालों ने ही 15 हजार रुपये चंदा करके मंकी कैचर को बुलाया था। बंदर को बोरे में भरकर कुसम्ही जंगल में छोड़ दिया गया। उसी के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।
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बंदरों ने गांव के पांच लोगों को काटकर घायल कर दिया था। 25 वर्षीय निखिलेश के पैर से तो मांस का टुकड़ा भी निकाल दिया। इसके बाद से ही ग्रामीणों में बंदर को लेकर आक्रोश था। सोमवार को सुबह ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने मंकी कैचरों को बुलवाया। सुबह करीब छह बजे से ही टीम उसे पकड़ने में जुट गई।
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करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद वह बौखलाए बंदर को पकड़ने में सफल हो गई। रेस्क्यू ऑपरेशन को देखने के लिए वहां पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। जैसे ही बंदर जाल में फंसा तो वहां मौजूद भीड़ चिल्लाने लगी। रेस्क्यू टीम ने उसे एक बोरे में भर लिया और कुसम्ही जंगल में ले जाकर छोड़ दिया।
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गांव के नंदलाल यादव ने कहा कि गांव में बंदरों का झुंड तो काफी समय से है, लेकिन एक ही बंदर यहां उत्पात मचा रहा था। अब वह पकड़ा गया है तो आराम से गांव में घूम सकेंगे। रामवृक्ष ने कहा कि बंदर के उत्पात की वजह से घर से निकलना मुश्किल हो गया था। बाइक से चलने वालों पर यह बहुत तेज हमला कर रहा था।


बाइक वालों पर कर रहा था हमला

कुछ दिनों पहले बगल के गांव बर्बसपुर में एक बंदर की मौत हो गई थी। ऐसी चर्चा है कि उसे किसी बाइक वाले ने ठोकर मारी थी। इसके बाद से ही बंदर दो पहिया वाहनों को देखकर हमला कर रहे हैं। बंदर के दहशत की वजह से महिलाएं छत पर नहीं जा रही थीं। बच्चे भी घर से बाहर नहीं निकल रहे थे।
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