{"_id":"6698597afc676a33430996f7","slug":"monday-on-the-first-day-of-sawan-and-also-sarvartha-siddhi-yoga-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-623711-2024-07-18","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"gorakhpur news: सावन के पहले ही दिन सोमवार और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों, जानें इससे जुड़ी प्रचलित मान्यता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
gorakhpur news: सावन के पहले ही दिन सोमवार और सर्वार्थ सिद्धि योग दोनों, जानें इससे जुड़ी प्रचलित मान्यता
Thu, 18 Jul 2024 11:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 18 Jul 2024 11:27 AM IST
सार
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि इस महीने में की गई उपासना से शिवजी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसी महीने में भक्त कांवड़ यात्रा कर पवित्र नदियों का जल शिवजी को चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने शिवलिंग पर जल अर्पित कर इसकी शुरुआत की थी। एक और मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान शिवजी के विषपान के बाद जलाभिषेक शुरू हुआ था।
विज्ञापन
सावन माह में इन चीजों को खरीदना होता है शुभ
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
सावन का महीना भगवान शिव को बहुत प्रिय है। इस माह में सनातनी हिंदू शिव के रंग में रंग जाते हैं। भगवान शिव की कृपा पाने का सर्वोत्तम महीना सावन है। सावन की शुरुआत 22 जुलाई सोमवार से हो रही है। पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग (नक्षत्रों के संयोग से बना शुभ योग) बना है, जो 72 वर्ष के बाद आया है। इस दिन से एक माह हर-हर महादेव की गूंज चारों ओर सुनाई देगी।
विज्ञापन
सावन
- फोटो : istock
नभगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धालु पूरे सावन महीने भगवान शिव की सेवा, पूजा-अर्चना व भक्ति में लीन रहते हैं। मान्यता है कि जो व्यक्ति सावन में सोमवार को व्रत करता है, उसके दांपत्य सुख में वृद्धि होती है। सावन में शिव जी को धतूर, बेलपत्र, अक्षत, चंदन, शहद आदि से अवश्य अर्चना करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
सावन में वास्तु उपाय
- फोटो : amar ujala
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि इस महीने में की गई उपासना से शिवजी जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। इसी महीने में भक्त कांवड़ यात्रा कर पवित्र नदियों का जल शिवजी को चढ़ाते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान परशुराम ने शिवलिंग पर जल अर्पित कर इसकी शुरुआत की थी। एक और मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान शिवजी के विषपान के बाद जलाभिषेक शुरू हुआ था।
सावन से पहले घर में करें ये बदलाव
- फोटो : amar ujala
आचार्य पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि श्रावण में भगवान शिव की विशेष उपासना की जाती है। पुराणों में इस महीने का जिक्र आया है और कहा गया है कि जो इस माह में आराधना करता है, उसे शिवजी प्रसन्न होकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं।
सावन
- फोटो : istock
ऐसे करें पूजा-अर्चना
सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इसमें शिवालय में स्थापित प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग या धातु से निर्मित लिंग अथवा नर्मदेश्वर (मिट्टी से बनी) शिवलिंग का गंगाजल व दूध से रुद्राभिषेक करें। यह शिवजी को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर गंगाजल कांवड़ में लेकर पैदल यात्रा कर अभिषेक करें। इससे अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है।
सावन में भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व होता है। इसमें शिवालय में स्थापित प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग या धातु से निर्मित लिंग अथवा नर्मदेश्वर (मिट्टी से बनी) शिवलिंग का गंगाजल व दूध से रुद्राभिषेक करें। यह शिवजी को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंगों पर गंगाजल कांवड़ में लेकर पैदल यात्रा कर अभिषेक करें। इससे अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है।