एमएमएमयूटी को देनी होगी नाइलिट को 28 एकड़ जमीन, चार साल से चल रहा है विवाद
- चार वर्ष से चल रहे जमीन के विवाद पर शासन ने जारी किया आदेश
- एक महीने में पूरी कर लेनी है हस्तांतरण की प्रक्रिया
विस्तार
गोरखपुर मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) और राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (नाइलिट) के बीच चार वर्षों से जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म हो जाएगा। एमएमएमयूटी को एक महीने के भीतर 28 एकड़ जमीन नाइलिट को देनी होगी।
इस जमीन पर नाइलिट बीते 32 वर्ष से काबिज भी है। सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। एक महीने में जमीन के हस्तांतरण प्रक्रिया को पूरा करने का भी निर्देश दिया गया है।
दरअसल, जमीन के विवाद को लेकर 25 जून 2020 को अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा, डीएम गोरखपुर, एमएमएमयूटी व नाइलिट के प्रमुख की बैठक हुई थी। जिसके बाद विशेष सचिव सुनील कुमार चौधरी ने हस्तांतरण प्रक्रिया पूरी करने के लिए पत्र जारी किया है।
इसमें कहा गया है कि 28 एकड़ जमीन, जो वर्तमान राजस्व अभिलेख में प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है, जिस पर नाइलिट संस्था 1988 से काबिज है, नाइलिट को हस्तांतरित किया जाना है।
2018 में एमएमएमयूटी ने जमीन खाली कराने का लिया निर्णय
एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो एसएन सिंह ने डीएम को फरवरी 2018 में पत्र लिखकर कहा था कि भूमि भारतीय इलेक्ट्रॉनिकी डिजाइन एवं प्रौद्योगिकी केंद्र (सीईडीटीआई) के लिए दी गई थी, जो कि अब बंद हो चुका है, ऐसे में 1988 के समझौते के अनुसार अब उक्त भूमि की सारी संपत्तियां फिर से एमएमएमयूटी की हो गई हैं।
फरवरी 2018 को एमएमएमयूटी के प्रबंध बोर्ड ने यह निर्णय लिया था कि भूमि उपयोग के समझौते के शर्तों का दूसरे पक्ष द्वारा उल्लंघन किया जा रहा है, ऐसे में नाइलिट को वर्तमान परिसर से कहीं और स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। बैठक में जमीन को खाली कराने के पीछे विश्वविद्यालय के विस्तार का हवाला दिया गया था।
ऐसे सुलझा मामला
- 6 जून 2017: केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच जमीन हस्तांतरण को लेकर सहमति बनी।
- 21 नवंबर 2017: प्रदेश सरकार ने डीएम गोरखपुर से कार्यवाही पूरी कराने का निर्देश दिया।
- 01 दिसंबर 2017: डीएम ने कुलपति को पत्र लिखकर शासन की मंशा से अवगत कराया। साथ ही हस्तांतरण डीड के लिए प्रतिनिधि नामित करने का अनुरोध किया।
- 7 फरवरी 2018: कुलपति ने सीईडीटीआई के बंद होने की बात कहकर संपत्ति को अपना बताया।
- 28 फरवरी 2018: एमएमएमयूटी प्रबंध बोर्ड ने नाइलिट पर समझौता शर्तों का उल्लंघन का आरोप लगाकर जमीन वापस लेने का निर्णय लिया।
- 8 जून 2018: डीएम ने कुलपति की आपत्तियों का निस्तारण किया, बताया कि हस्तांतरण
- करना शासन का निर्णय, शीघ्र पूरी प्रक्रिया कराएं।
- 25 जून 2020: अपर मुख्य सचिव प्राविधिक शिक्षा ने मामले के स्थायी समाधान के
- लिए सभी पक्षों के साथ बैठक की।
- 09 जुलाई 2020: शासन ने निर्देश जारी कर 28 एकड़ जमीन को नाइलिट को हस्तांतरण कराने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है।
नाइलिट निदेशक डॉ. एकेडी द्विवेदी ने कहा कि शासन ने न्यायोचित निर्णय लिया है। शासन के निर्देश के क्रम में एमएमएमयूटी के कुलपति से संपर्क किया जाएगा। जमीन के हस्तांतरण प्रक्रिया भी जल्द से जल्द पूरी कराई जाएगी।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो एसएन सिंह ने कहा कि शासन के आदेश की कॉपी अभी नहीं मिली है। आदेश आने पर अध्ययन किया जाएगा और नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।