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खुशखबर: ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म हासिल करने वाला प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय बना एमएमएमयूटी
Wed, 04 May 2022 02:32 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 04 May 2022 02:32 PM IST
सार
एमएमएमयूटी प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति ने कहा कि समर्थ ईआरपी प्लेटफॉर्म को हासिल करने के लिए करीब एक वर्ष से प्रयास किया जा रहा था। यह प्लेटफॉर्म प्राप्त करने वाला एमएमएमयूटी प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय है, ऐसे में हम इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं।
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- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) को केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने ‘समर्थ’ ईआरपी (इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) यानी अपना ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म दे दिया है। विश्वविद्यालय के लिए यह बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि एमएमएमयूटी प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय है, जिसे यह प्लेटफॉर्म हासिल करने में सफलता मिली है। समर्थ प्लेटफॉर्म मिलने के बाद विश्वविद्यालय को ऑनलाइन गवर्नेंस की सारी सुविधाएं मिलने लगेंगी, जो अब तक केवल केंद्रीय विश्वविद्यालयों व चुनिंदा विश्वविद्यालय को मिलती रहीं हैं।
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विश्वविद्यालय व उच्च शिक्षा संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षा के राष्ट्रीय मिशन के तहत समर्थ इंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग के नाम से ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म लांच किया था। इसमें कुल 38 प्लेटफॉर्म हैं, जिसका इस्तेमाल जुड़ने वाले शिक्षण संस्थान कर रहे हैं। यह सुविधा अब प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय को भी मिल गई।
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इससे कर्मचारी प्रबंधन, शिकायत प्रबंधन, आईटीआई प्रबंधन, कानूनी मामले का प्रबंधन, संपत्ति प्रबंधन, शुल्क प्रबंधन, फाइल प्रबंधन, अनुसंधान प्रबंधन, स्वास्थ्य सुविधा प्रबंधन, परिवहन प्रबंधन, प्रशिक्षण व प्लेसमेंट, खेल सुविधा, बजट प्रबंधन आदि सुविधाएं मिलेंगी। इसके अलावा इस प्लेटफॉर्म पर मौजूद डाटा का इस्तेमाल भी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कर सकेगा।
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एमएमएमयूटी प्रो. जेपी पांडेय, कुलपति ने कहा कि समर्थ ईआरपी प्लेटफॉर्म को हासिल करने के लिए करीब एक वर्ष से प्रयास किया जा रहा था। यह प्लेटफॉर्म प्राप्त करने वाला एमएमएमयूटी प्रदेश का पहला राज्य विश्वविद्यालय है, ऐसे में हम इसे बड़ी उपलब्धि मान रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से विश्वविद्यालय में अध्ययन-अध्यापन का स्तर तो उठेगा ही, कार्यालयी प्रबंधन भी बेहतर होगा, जिसका सीधा लाभ विद्यार्थियों को मिलेगा।