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परिवार के लिए जिल्लत: पुलिस के लिए सिरदर्द बनी नाबालिग मोहब्बत, केस दर्ज कराने के लिए दौड़ रहे हैं लोग

Mon, 17 Jan 2022 12:14 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 17 Jan 2022 12:14 PM IST
सार

पिछले साल 313 लड़कियों को पुलिस ने भेजा घर, दोबारा घर से गायब हुईं थीं 89 लड़कियां। आरोपी जेल में, घरवालों पर केस दर्ज कराने के लिए लड़की के परिवार वाले पहुंच रहे अफसरों के पास।

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Minor love became a headache for police in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

गोरखपुर में कच्ची उम्र की मुहब्बत परिवार के लिए जिल्लत तो पुलिस के लिए सिरदर्द बन गई है। बीते साल 2020 में पुलिस ने जिले भर से लापता हुई 313 लड़कियों को खोजकर घर पहुंचा। इसमें से 89 ऐसी लड़कियां हैं, जिसे पुलिस को दूसरी या फिर तीसरी बार खोज कर घर पहुंचाना पड़ा। इस काम में देरी होने पर पुलिस पर सवाल भी उठे। इतना ही नहीं, इस उम्र के लड़के-लड़की का लगाव दो परिवारों में अलगाव की बड़ी वजह भी बन रही है।

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जानकारी के मुताबिक, पुलिस की समस्या अलग है। यदि इन मामलों में किशोरी नहीं मिल पाती, तो उसपर सवाल उठने लगते हैं। आरोपी से मिलीभगत के आरोप लगते हैं। मामला अफसरों तक पहुंचता है तो उनकी नाराजगी भी झेलनी पड़ती है। पुलिस के मुताबिक, किशोरियों को बहला-फुसलाकर भगाने के मामलों के पीछे कहीं अशिक्षा तो कहीं खुद को आधुनिक साबित करने की होड़ प्रमुख वजह है।
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मनोवैज्ञानिक इसे पश्चिमी संस्कृति के अंधानुकरण का प्रभाव बताते हैं। दोनों का ही मानना है कि फिल्म, टीवी के बाद सोशल मीडिया के विविध आयाम की पहुंच हर घर तक है। जीवकोपार्जन की उलझन में अभिभावक बच्चों को पूरा समय नहीं दे पाते। ऐसे में किशोर-किशोरियां इस तरह के मामलों में पड़ जाते हैं।
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ज्यादातर मामलों में आती है दोनों की रजामंदी

पुलिस के मुताबिक, इस तरह के मामलों में अक्सर लड़की पक्ष की ओर से तहरीर में छेड़खानी या बहला फुसलाकर ले जाने जैसे आरोप लगाए जाते हैं। जबकि जांच में ज्यादातर मामलों में दोनों की रजामंदी सामने आती है। पकड़े जाने पर लड़की के नाबालिग मिलने पर पुलिस उन्हें घर या महिला आश्रय केंद्र भेजती है और फिर आरोपित पर दुष्कर्म का केस भी दर्ज होता है। जबकि बालिग युगल को शादी के लिए हरी झंडी दे देती है। अभी शनिवार को ही इस तरह के एक मामले में चौरीचौरा पुलिस ने बालिग होने का हवाला देकर कार्रवाई से मना कर दिया।

केस 1

गुलरिहा थाना क्षेत्र से एक किशोरी लापता हो गई। परिजनों की सूचना पर पुलिस ने बहला फुसला कर भगाने का केस दर्ज किया, फिर तलाश शुरू की गई। 11 जनवरी को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मामला प्रेम प्रपंच का निकला, लेकिन उम्र कम होने की वजह से केस दर्ज कर पुलिस ने आरोपी को जेल भेजवा दिया।

केस 2

गगहा इलाके से 16 साल की लड़की लापता हो गई। परिजनों ने पुलिस को तहरीर देकर अपहरण का आरोप लगाया। तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर तलाश शुरू की गई। छह जनवरी को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। नाबालिग होने की वजह से पुलिस ने दुष्कर्म की धारा भी बढ़ा दी थी।

केस 3

उरुवा इलाके से एक लड़की के लापता होने पर पुलिस ने केस दर्ज कर जब आरोपित को गिरफ्तार किया तो मामला प्रेम का सामने आया। लेकिन, नाबालिग होने की वजह से पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो की धारा बढ़ा दी और आरोपित को जेल भेजा गया।

एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने कहा कि लड़कियों के लापता होने के मामले में पुलिस केस दर्ज कर कार्रवाई करती है। कई ऐसे मामले भी आते हैं, जिसमें घरवाले लड़की के दोबारा गायब होने की शिकायत करते है। ऐसे मामलों में केस दर्ज कर कार्रवाई के साथ ही पुलिस काउंसिलिंग भी करती है। 2020 में पुलिस ने 313 लड़कियों को खोजकर सकुशल घर तक पहुंचाने का काम किया है।
 

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