त्योहारों में जुआ: नेपाली कसीनो लगे भुलाने...दिवाली के बहाने नेपाल के जुआरी आ रहे मोटे दांव लगाने
मेडिकल कॉलेज के पास स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में शहर के बड़े रईस जुआ खेलने बैठते हैं। यहां प्रतिदिन करोड़ों रुपये की जीत-हार का सौदा होता है। इसके अलावा नार्मल स्कूल के पास भी किराए के एक मकान में ऐसे ही सफेद कॉलर वाले शौकीन आकर बड़ा-बड़ा दांव लगा रहे हैं।
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जुए के लिए नेपाल के कसीनो बदनाम हैं, मगर दिवाली पर जुआरी उन्हें भूले हुए हैं। उल्टे नेपाल के जुआरी अपने शहर में हाथ आजमाने आ रहे हैं। शहर में लाखों-करोड़ों के दांव लग रहे हैं। जैसा इलाका वैसा कसीनो और वैसे ही दांव। आलम तो यह है कि शहर के अधिकतर इलाकों में मिनी कसीनो धड़ल्ले से चल रहे हैं। गलियों से लेकर अपार्टंमेंट और किराए के मकानों में तक एक झटके में मोटे दांव लगाए जा रहे हैं।
सट्टेबाजी का संचालन करने वाले एक सूत्र ने बताया कि इस धंधे में सिर्फ छोटे ही नहीं, बल्कि शहर की अच्छी शख्सियत वाले लोग भी जुड़े हैं। ये लोग अपार्टमेंट से लेकर किराए पर मकान लेकर जुआ खेलवाते हैं। इसके बदले इन्हें मोटा कमीशन मिलता है। पिछले दिनों ऐसे ही एक कसीनो पर कार्रवाई हुई थी।
सूत्रों के मुताबिक, अब इस खेल के पीछे के किरदार और जगह दोनों बदल गए हैं। मेडिकल कॉलेज के पास स्थित एक अपार्टमेंट के फ्लैट में शहर के बड़े रईस जुआ खेलने बैठते हैं। यहां प्रतिदिन करोड़ों रुपये की जीत-हार का सौदा होता है। इसके अलावा नार्मल स्कूल के पास भी किराए के एक मकान में ऐसे ही सफेद कॉलर वाले शौकीन आकर बड़ा-बड़ा दांव लगा रहे हैं।
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इसके अलावा, कुनराघाट के आगे विशुनपुरवा और कुसम्ही बाजार के पास भी खुले मैदान में जुआ खेला जा रहा है। यहां इन इलाकों के जमीन से लेकर सोने-चांदी के धंधेबाज और कारीगर खुलकर जुआ खेलते हैं। डांगीपार, दिव्यनगर, काॅर्मल स्कूल के पास भी धनतेरस की सुबह से ही जुआ चलता रहा।
इसके अलावा शहर में एक बेहद चर्चित नाम की तरफ से रुस्तमपुर और ट्रांसपोर्टनगर के पास बड़े पैमाने पर जुए का धंधा जोरों पर रहा। नेपाल के सैकड़ों लोग दीपावली के दिन अपनी किस्मत आजमाने गोरखपुर और आस-पास के जिलों में आते हैं। ऐसे में ये धंधा यहां खूब फलने-फूलने लगता है।
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मिनी कसीनो में बढ़ जाता है बीयर के बोतल का दाम
त्योहार के समय जुआ खेलवाने वाले कबाब और शराब का भी इंतजाम रखते हैं। सूत्र ने बताया कि रात में बीयर के बोतल की कीमत 800 रुपये तक हो जाती है। खेलते समय अधिकतर जुआ खेलने वाले बीयर ही पीना पसंद करते हैं। इसके अलावा संचालक, सफेदपोशों के लिए ब्रांडेड शराब का भी इंतेजाम रखते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें भारी कीमत देनी पड़ती है। बाहर बिकने वाली शराब के लिए दस गुना अधिक दाम देना पड़ता है। इसके अलावा रात के समय रजनीगंधा पान मसाले का दाम डेढ़ सौ रुपये तक हो जाता है।
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ताश की गड्डी से दिखाते हैं कलाबाजी
धंधे के एक सूत्र ने बताया कि ताश की गड्डी में अंदर-बाहर का खेल प्रमुख होता है। इसमें गड्डी फेंटकर उसमें से एक पत्ती निकाली जाती है। फिर गड्डी के पत्ते बाहर दाएं-बाएं तरफ फेंकते हैं। इसमें निकाली पत्ती जिस तरफ गिरती है, वो दांव जीत जाता है। ऐसे ही अगर तीन बार दांव एक ही जुआरी जीतता है तो उसे इसके बाद अगले हर दांव पर पांच सौ रुपये तक देना पड़ता है, जबतक गड्डी उसके हाथ में होती है। बड़े खिलाड़ी इस रकम को और बढ़ा देते हैं।इसे भी पढ़ें: ट्रेन में सीट तक पहुंचे मतलब गंगा नहा लिए, स्लीपर कोच की हालत जनरल जैसी