तत्काल टिकट में खेल: बिना बिचौलियों के सफर भूल जाइए, काउंटर पांच मिनट में हो जा रहा फुल
दिल्ली-मुंबई, अहमदाबाद समेत सभी बड़े शहरों से गोरखपुर आने के लिए ट्रेनों में सीटें फुल हैं। रेलवे के अधिकृत काउंटर व ऑनलाइन तत्काल कोटे की बुकिंग में एक से दो टिकट ही कंफर्म मिल पा रहा है, इसके बाद वेटिंग टिकट मिलना शुरू हो जा रहा है।
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त्योहारों पर घर लौटने वालों की मुसीबत हो गई है। रेलवे के तमाम दावों-सुविधाओं की हकीकत यह है कि एक तो ट्रेनों में टिकट मिल नहीं रहा, मिल भी रहा तो बिचौलियों की वजह से जेब ज्यादा ढीली करनी पड़ रही है। बिचौलियों ने रेलवे की तत्काल सेवा में भी सेंध लगा दी है।
काउंटर खुलते ही पांच मिनट में फुल हो जा रहा, लेकिन बिचौलिए प्रति टिकट 700 से 1000 रुपये ज्यादा लेकर आसानी से लोगों को कंफर्म टिकट तक उपलब्ध करा दे रहे हैं।
दिल्ली-मुंबई, अहमदाबाद समेत सभी बड़े शहरों से गोरखपुर आने के लिए ट्रेनों में सीटें फुल हैं। रेलवे के अधिकृत काउंटर व ऑनलाइन तत्काल कोटे की बुकिंग में एक से दो टिकट ही कंफर्म मिल पा रहा है, इसके बाद वेटिंग टिकट मिलना शुरू हो जा रहा है।
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तत्काल टिकट की बुकिंग अब तीन दिन पहले से होती है। सुबह 10 बजे स्लीपर क्लास व 11 बजे एसी क्लास की बुकिंग की जाती है। तत्काल टिकट के लिए आधी रात में ही आकर लोग डट जाते हैं। सुबह तक कतार लग जाती है। 10 बजे जैसे ही काउंटर खुलता है और पांच-छह टिकट बुक होता है, तब तक सीटें फुल हो जाती हैं। कतार में खड़े जिन पांच-छह लोगों का टिकट कटता है, उसमें से भी दो-तीन ही आम लोग होते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, वहां सक्रिय दलाल प्रति टिकट 700 से 1000 रुपये लेकर कंफर्म टिकट वसूलते हैं। वहीं, ऑनलाइन टिकट बुकिंग वालों ने भी अपने नेटवर्क के जरिए सेंधमारी कर रखी है। ये लोग ऐसा साफ्टवेयर इस्तेमाल करते हैं, जिसमें यात्री का ब्योरा दर्ज करने के बाद पासवर्ड डालने की जरूरत नहीं होती। इस वजह से जैसे ही सर्वर खुलता है, इनके पोर्टल पर भरा डॉटा स्वत: ही सारी प्रक्रिया पूरी कर टिकट जेनरेट कर देता है।
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आरपीएफ इंस्पेक्टर दशरथ प्रसाद ने बताया कि टिकट के धंधेबाज की जांच की जाती है, तो उसकी जांच कर कार्रवाई होगी।