फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Mauni Amavasya will be celebrated on January 21

Mauni Amavasya: शुभ संयोग में श्रद्धालु लगाएंगे आस्था की डुबकी, 21 जनवरी को मनेगी मौनी अमावस्या

Thu, 19 Jan 2023 05:32 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 19 Jan 2023 05:32 PM IST
सार

वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन अमावस्या तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात में दो बजकर 49 मिनट तक, पूर्वाषाढ़ नक्षत्र दिन में नौ बजकर 10 मिनट पश्चात उत्तराषाढ़ नक्षत्र है। इस दिन हर्षण योग भी दिन में दो बजकर 46 मिनट तक और इस दिन मातंग नामक शुभ औदायिक योग भी है।

विज्ञापन
Mauni Amavasya will be celebrated on January 21
मौनी अमावस्या। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (मौनी अमावस्या) 21 जनवरी शनिवार को आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालु राप्ती सहित आसपास की पवित्र नदियों और सरोवरों में डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे।

विज्ञापन


वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, इस दिन अमावस्या तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात में दो बजकर 49 मिनट तक, पूर्वाषाढ़ नक्षत्र दिन में नौ बजकर 10 मिनट पश्चात उत्तराषाढ़ नक्षत्र है। इस दिन हर्षण योग भी दिन में दो बजकर 46 मिनट तक और इस दिन मातंग नामक शुभ औदायिक योग भी है।
विज्ञापन


मौनी अमावस्या का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, प्रत्येक अमावस्या को सूर्य और चंद्रमा का सम्मिलन होता है। सूर्य आत्मा का प्रतीक और चंद्रमा मन का कारक है। इस तिथि के स्वामी पितर गण हैं। इस तिथि पर दान-स्नान से देवताओं की कृपा के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है। इसलिए इस दिन को मनु अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन मौन व्रत धारण करके ही स्नान करना चाहिए। तिल और गुड़ का दान करने से शनि और सूर्य की पीड़ा समाप्त हो जाती है। पीपल में सभी देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए पीपल की पूजा करें।


 

ऐसे करें पूजन

ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का संकल्प लेकर संगम या पवित्र नदी में स्नान करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा का पीले फूल, केसर, चंदन, घी के दीपक और प्रसाद के साथ पूजन करें। भगवान का ध्यान करने के बाद विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्त्र नाम का जप करें। मंदिर या नदी तट पर दीपदान करना न भूलें। सायंकाल भी धूप से आरती करें। पीले मीठे पकवान का भोग लगाएं। अगले दिन गो को खिलाने के बाद व्रत का पारण करें।

पितृकर्म और देवकर्म का है दिन
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, धर्मशास्त्र में अमावस्या को पितृकर्म और देवकर्म दोनों के लिए प्रशस्त दिन माना गया है। इस महीने में सूर्य मकर राशिगत होने से देवगणों के लिए यह अत्यंत हर्ष का समय रहता है, इसलिए देवी-देवता और सभी तीर्थों के अधिपति पृथ्वी पर आ जाते हैं। ये नदियों के संगम पर स्नान करते हैं। अत: संगम पर स्नान से इनका सानिध्य और आशीर्वाद प्राप्त होता है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed