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मां से मिलने निकली थी युवती, भटककर पहुंच गई गोरखपुर, अब तीन माह बाद अपनों से मिलकर छलके आंसू
Wed, 10 Jun 2020 12:27 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 10 Jun 2020 12:27 PM IST
सार
- बिहार की लापता युवती की मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन कर रहा था देखभाल
- 18 मार्च को आजमगढ़ पुलिस ने युवती को मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन को किया था सुपुर्द
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मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन द्वारा युवती को दिया गया भेंट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
बिहार के सुपौल के वार्ड नंबर दो की रहने वाली युवती माजता परवीन आखिरकर तीन माह बाद अपने परिवार से मिल गई। पिता और बेटी के खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मानसिक रूप से बीमार माजता को ठीक देखकर बुजुर्ग पिता ने खुशी जताते हुए मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन के संचालक आलोक मणि त्रिपाठी के प्रति आभार जताया है।
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जानकारी के मुताबिक, सुपौल के वार्ड नंबर दो की रहने वाली माजता परवीन बड़े भाई के साथ पंजाब में रहती थी। मां से मिलने वह 16 मार्च को ट्रेन से बिहार जा रही थी। माजता के पिता के मुताबिक देवरिया रेलवे स्टेशन पर वह छूट गई। इसके बाद उसे ढूंढने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन वह नहीं मिली।
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बताया कि उसकी मानसिक स्थिति खराब थी। इस बीच वह आजमगढ़ पहुंच गई और वहां से 18 मार्च को उसे आजमगढ़ पुलिस ने गोरखपुर के मातृ छाया चैरिटेबल फाउंडेशन को सुपुर्द कर दिया।
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आलोक मणि त्रिपाठी ने बताया कि मनोचिकित्सक अभिनव श्रीवास्तव ने इलाज शुरू किया।
असर यह रहा है कि 15 दिनों बाद उसने अपने घर की जानकारी दी। इसके बाद परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। हालांकि दुख की बात यह रही है कि माजता की मां ने बेटी के लापता होने के गम में दुनिया छोड़ गई।
मंगलवार को पिता उसे लेने गोरखपुर पहुंचे तो उन्हें देख माजता ने गले लगा लिया और कभी दूर न जाने की कसम खाई। इसके बाद उसे लेकर चले गए।