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बिना बैंड बाजा के ही दुल्हन लेने पहुंचे दूल्हे राजा, लोगों ने कहा- इससे अच्छा कुछ नहीं
Mon, 04 May 2020 05:09 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, संतकबीरनगर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 04 May 2020 05:09 PM IST
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शादी के दौरान मास्क लगाकर बैठे दूल्हा-दुल्हन।
- फोटो : अमर उजाला।
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लॉकडाउन के बीच सोमवार को जिगिना गांव में हुई शादी में न बाजा बजा और न ही बराती आए। बेहद सादगी के साथ सामाजिक दूरी का अनुपालन करते हुए पुरोहितों ने शादी की रश्म संपंन कराया। इस शादी की चर्चा क्षेत्र में खूब रही।
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क्षेत्र के जिगिना गांव में सोमवार को दिन में करीब 12 बजे तीन लोगों के साथ शादी करने दुल्हा पहुंचा तो घराती पक्ष के दो लोगो ने स्वागत किया। उसके बाद पुरोहित ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ वर और कन्या की शादी करा दी।
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बभनौली गांव निवासी तीरथ लोहार के पुत्र अनिल की शादी छह माह पहले जिगिना गांव निवासी राममिलन लोहार की बेटी सावित्री के साथ तय हुई थी। कोरोना वायरस के कारण पूरे देश में लॉकडाउन हो गया।
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तीन लोग पहुंचे बरात
इसकी वजह से शादी पर भी संकट के बादल मंडराने लगे तो दोनों पक्षों ने एक सप्ताह पहले सरकार द्वारा जारी गाइड लाइन के तहत शादी करने का निर्णय लिया। सोमवार को लॉकडाउन का पालन करते हुए दूल्हा और उसके पिता तीरथ समेत तीन लोग बरात लेकर जिगिना गांव दिन में पहुंचे।
वहां बारातियों का स्वागत करने के बाद लड़की पक्ष के लोगों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए शादी की रश्म की शुरुआत की। पुरोहित महेंद्र पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दिन में 12 बजे वर और कन्या की शादी संपंन कराई।
न कोई शोर और न ही भीड़, आसानी से शादी संपंन होने के बाद गांव के लोगों ने कहा कि यह अच्छी शुरुआत है। फिजूल खर्ची से जहां दोनों पक्ष बच गए, वही सही ढंग से काम भी हो गया।
वहां बारातियों का स्वागत करने के बाद लड़की पक्ष के लोगों ने सामाजिक दूरी का पालन करते हुए शादी की रश्म की शुरुआत की। पुरोहित महेंद्र पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दिन में 12 बजे वर और कन्या की शादी संपंन कराई।
न कोई शोर और न ही भीड़, आसानी से शादी संपंन होने के बाद गांव के लोगों ने कहा कि यह अच्छी शुरुआत है। फिजूल खर्ची से जहां दोनों पक्ष बच गए, वही सही ढंग से काम भी हो गया।