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बेगुनाहों की जिंदगी बिगाड़ने वालों को कब मिलेगी सजा, इंसाफ के लिए दौड़ लगा रहे हैं ये लोग

Sun, 25 Oct 2020 05:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 25 Oct 2020 05:39 PM IST
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many innocent people accused in fake arms license case demand justice in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में पिछले साल प्रकाश में आए फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में असल गुनहगारों को सजा कब मिलेगी, यह सवाल ही बना हुआ है। वहीं, इस मामले में पुलिस की जल्दबाजी और नासमझी के कारण 10 बेगुनाहों की जिंदगी बिगाड़ दी। मामला ऐसा तूफान बनकर आया कि इनका जीवन अस्तव्यस्त हो गया। उन्हें इस पीड़ा से आज भी निजात नहीं मिली है। इंसाफ के लिए वह दौड़ लगा रहे हैं, लेकिन उनकी जिंदगी में ऐसा झंझावत लाने वालों को शायद ही इसकी परवाह हो।

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दरअसल, फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में आरोपित बनाए गए लोगों में से कोई 10 दिन जेल की कोठरी में रहा तो कुछ ने एक महीना सलाखों के पीछे गुजारा। बहुत मुश्किल से जमानत मिली तो जिंदगी परेशानियों की अंधेरी सुरंग में फंस चुकी थी। हालांकि, जिस लाइसेंस को फर्जी बताया गया था उसे प्रशासन ने सही करार दे दिया। असलहे भी लौटा दिए, लेकिन इन्हें परेशानियों से मुक्ति नहीं मिली। इस वजह से जो दर्द और परेशानियां इन्होंने सही, उसका कोई हिसाब-किताब नहीं लगाया गया।
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सरकारी नौकरी करने वाले कुछ आरोपित निलंबित कर दिए गए थे। प्राइवेट नौकरी करने वालों की सेवामुक्त करने का जवाब मिल चुका था। इस तरह इनसे इनके जीने का आधार छीना जा चुका था। जग हंसाई और तंगहाली की वजह से किसी की बिटिया की शादी टूट गई तो किसी के बेटे का विवाह नहीं हो पाया। कुछ को मुफलिसी ने ऐसा घेरा कि बच्चों की पढ़ाई छूट गई। सब कुछ पानी की तरह साफ होने के बावजूद मुकदमे से बरी होने के लिए ये लोग आज भी दौड़ लगा रहे हैं। ये सभी बहुत वाजिब सवाल करते हैं कि जिनकी गलती की सजा मुझे मिली उन्हें कब और कौन सजा देगा?

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फर्जी शस्त्र लाइसेंस मामले के ये हैं वे बेगुनाह

खोराबार कुईं बाजार निवासी विनोद कुमार, जर्दा गांव के भैंसहा टोला निवासी जगदीश शुक्ला, जंगलसिकरी निवासी मोहम्मद बिन कासिम, छपरा गांव निवासी रामहित यादव, मिर्जापुर निवासी राम आशीष, जंगल रामलखना निवासी विजय प्रताप सिंह, जंगल चौरी टोला शेख निवासी महताब आलम, रायगंज बाजार निवासी राम चंद्र, नवां अव्वल निवासी राम नयन और राम निवास यादव निवासी जंगलचौरी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस के आधार पर हथियार रखने के आरोप में जेल भेजा गया था। इनमें से सभी को आठ महीने पहले ही जिला प्रशासन की तरफ से कलेक्ट्रेट में मौजूद शस्त्र लाइसेंस की मूल पत्रावली की सत्यापित नकल जारी हो चुकी है। एडीएम (सिटी) राकेश कुमार श्रीवास्तव, खोराबार थानाध्यक्ष को पत्र लिखकर कह चुके हैं कि संबंधित के शस्त्र लाइसेंस से जुड़े प्रमाणित अभिलेख कलेक्ट्रेट से मिल गए हैं, इनके शस्त्र लाइसेंस कलेक्ट्रेट से जारी हुए हैं। ऐसे में उक्त साक्ष्य के आधार पर विवेचना जल्द पूरी कर संबंधित न्यायालयों में रिपोर्ट दे दी जाए।
 
एक-दूसरे पर उठाते रहे सवाल
खोराबार के 10 लोगों के शस्त्र लाइसेंस फर्जी बताकर उन्हें जेल भेजने का मामला खुलते ही पुलिस और प्रशासन के बोल बदल गए थे। दोनों एक-दूसरे पर सवाल उठाने लगे। जिला प्रशासन का कहना था कि उनकी मजिस्ट्रियल जांच पूरी होने के पहले ही पुलिस ने संबंधित लोगों को जेल भेज दिया। वहीं, पुलिस का कहना है कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर उन्होंने कार्रवाई की।

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