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मनीष हत्याकांड: बीमारी के बहाने फरार हुए इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा

Wed, 06 Oct 2021 04:29 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 06 Oct 2021 04:29 PM IST
सार

सोशल मीडिया पर रामगढ़ताल थाने की जीडी वायरल हुई है। इसमें भी कई सच नहीं दर्ज किए गए हैं। इंस्पेक्टर ने लिखा- मनीष को पहले जिला अस्पताल लेकर गए थे, जबकि वहां गए ही नहीं। मनीष की मौत के बाद घटना वाली रात ही आरोपी सर्विस रिवाल्वर, कारतूस और सीयूजी नंबर जमा कर गए।

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Manish murder case: Inspector JN Singh and Inspector Akshay Mishra absconded on pretext of illness
आरोपी जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के बाद हत्यारोपी रामगढ़ताल थाने के तत्कालीन इंस्पेक्टर जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा घटना की रात ही खुद को बीमार बताकर फरार हो गए थे। इसका खुलासा थाने की जीडी (जनरल डायरी) से हुआ है। घटना की रात ही सर्विस रिवाल्वर, कारतूस को इंस्पेक्टर और चौकी इंचार्ज ने जमा कर दिया था। साथ ही थाने का सीयूजी नंबर भी सुपुर्द कर दिया गया था। जीडी मंगलवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। जीडी में तथ्यों का उल्लेख करने के दौरान कई सच छिपाए गए हैं।

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थाने की जीडी में लिखे गए झूठ की तस्दीक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज व अन्य साक्ष्यों से हुई है। जीडी में लिखा है- ‘मनीष के घायल होने पर पुलिस वाले उसे जिला अस्पताल लेकर गए थे और फिर वहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया।’ यह सफेद झूठ है। एसआईटी ने झूठ पकड़ भी लिया है। मानसी अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मनीष को लेकर पुलिस जिला अस्पताल नहीं गई थी। घटना के बाद मनीष को पहले मानसी अस्पताल, फिर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया था।
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मेडिकल कॉलेज में भी भर्ती के लिए बनवाए गए दो पर्चों में भी मानसी अस्पताल का ही जिक्र है। साफ है कि मनीष को जिला अस्पताल नहीं ले जाया गया था। जीडी में यह भी जिक्र है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने की कोशिश की गई थी, लेकिन डॉक्टराें ने देखते ही मृत घोषित कर दिया था। अगर ऐसा था, तो मनीष को भर्ती कराने के दो पर्चे कैसे बन गए? 20 मिनट तक किस मनीष का इलाज हुआ? जीडी और हकीकत के बीच के झूठ को एसआईटी ने भी पकड़ लिया है।
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आला अफसर के आदेश पर गए थे जांच करने
इंस्पेक्टर जगत नारायण ने जीडी में लिखा है कि एसएसपी की 27 सितंबर को जटेपुर में मीटिंग थी। वहां से निकलने के बाद क्षेत्र में भ्रमण पर थे, तभी अधिकारियों का मौखिक आदेश होटल/ढाबा चेकिंग का आया था। इसके बाद चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा व हमराह को लेकर होटल कृष्णा पैलेस में गए थे। जहां पर मैनेजर के साथ रूम नंबर 512 की जांच की गई। आईडी चेक की गई, इस दौरान एक व्यक्ति हड़बड़ाकर मुंह के बल गिर गया। घायल को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

जीडी में लिखी गई ये बातें जांच में झूठी

  • मनीष को सबसे पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, फिर मेडिकल कॉलेज रेफर हुआ।
  • मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने से पहले ही डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
  • मानसी अस्पताल ले जाने का जिक्र ही नहीं है।
  • होटल में चेकिंग के दौरान मैनेजर को साथ लेकर जाने की बात कही गई, जबकि ऐसा नहीं था। होटल कर्मचारी आदर्श साथ गया था।


गलतबयानी : मनीष के घायल होने के बाद बुलाए पुलिस कर्मी
जीडी में इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने लिखा है कि होटल में चेकिंग के दौरान हड़बड़ाकर गिर जाने के बाद मनीष घायल हो गए, फिर पुलिस वालों को बुलाया गया। उप निरीक्षक विजय यादव और उप निरीक्षक राहुल दुबे को हमराही ने फोन कर बुलाया था, फिर सरकारी जीप से ये लोग मनीष को लेकर जिला अस्पताल गए थे। जहां से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया था। मनीष की मौत के बाद विजय और राहुल यादव को निगरानी के लिए छोड़ दिया गया था। वहां से हमराही, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा, हेड कांस्टेबल कमलेश यादव, प्रशांत कुमार के साथ वापस कृष्णा होटल पहुंचे थे।

वहां पर कानून व्यवस्था को देखा गया और फिर अधिकारियों को भी जानकारी दी गई। दोनों हमराहियों को थाने छोड़कर फिर कांस्टेबल प्रवीण कुमार पांडेय, अंकित कुमार सिंह, सचिन कुुमार यादव को साथ लेकर पुन: मेडिकल कॉलेज गए जहां पहुंचकर मेडिकल कॉलेज में पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए शांति व्यवस्था बनाई गई। मृतक के परिजनों के पहुंचने से पहले ही वापस थाने आ गए। तबीयत खराब होने पर अक्षय मिश्रा को रवाना किया गया, फिर मैं (इंस्पेक्टर) बीमार होने की वजह से इलाज कराने जा रहा हूं।

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