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मनीष हत्याकांड: होटल में हादसा या हत्या जानने के लिए कानपुर से आई एसआईटी ने किया घटना का सीन री-क्रिएट

Sun, 03 Oct 2021 11:35 AM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 03 Oct 2021 11:35 AM IST
सार

मनीष हत्याकांड की जांच करने के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम शनिवार को गोरखपुर पहुंची। टीम ने रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के होटल कृष्णा पैलेस की जांच की। यह टीम अध्यक्ष अपर पुलिस आयुक्त, कानपुर आनंद कुमार तिवारी के नेतृत्व में गोरखपुर पहुंची है।

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Manish Gupta murder case Kanpur SIT reached Gorakhpur for investigation
मनीष हत्याकांड में जांच करने गोरखपुर पहुंची एसआईटी कानपुर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत हादसा थी या हत्या, यह जानने के लिए कानपुर से आई पुलिस की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम ने शनिवार को घटनास्थल होटल कृष्णा में घटना का सीन री-क्रिएट कर 6:30 घंटे तक माथापच्ची की। एसआईटी शनिवार शाम चार बजे रामगढ़ताल थाना क्षेत्र के होटल कृष्णा पैलेस में पहुंच गई थी और रात साढ़े दस बजे तक जांच पड़ताल की। इस दौरान टीम ने सीसीटीवी फुटेज को भी देखा।

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घटना के अगले दिन जांच करने वाली गोरखपुर फोरेंसिक टीम को भी मौका मुआयने के दौरान साथ में रखा गया। अलबत्ता, रामगढ़ताल थाने की पुलिस को इस दौरान इस ओर फटकने नहीं दिया गया। वहीं, शासन ने इस मामले में शुक्रवार को ही सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी, मगर सीबीआई के केस हाथ में लेने से पूर्व एसआईटी तफ्तीश करती रहेगी।  
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जानकारी के मुताबिक, कानपुर एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) शनिवार को डीआईजी गोरखपुर जे रविंद्र गौड़ से मुलाकात करने के बाद शाम करीब चार बजे कैंट पुलिस के साथ होटल कृष्णा पैलेस पहुंची थी। कमरा नंबर 512 में पहुंचकर जांच की शुरुआत की गई। गोरखपुर फोरेंसिक टीम से बातचीत कर जानकारी हासिल करने के बाद कानपुर फोरेंसिक एक्सपर्ट ने सीन री-क्रिएशन का काम किया।

इसकी मदद से टीम ने यह जानने की कोशिश की है कि पुलिस वाले कैसे आए होंगे? कमरे को कैसे खुलवाया होगा, कमरे के अंदर कौन कैसे था और फिर क्या हुआ? करीब तीन घंटे तक सीन को रीक्रिएट कर एसआईटी ने बारीकी से इसे समझने की कोशिश की है कि आखिर उस रात कब, कैसे और क्या हुआ था? फिलहाल टीम की ओर से यही जवाब दिया गया है कि इस मामले की जांच जारी है। जांच के दौरान सीओ कैंट श्यामदेव भी एसआईटी कानपुर के साथ मौजूद रहे।

कर्मचारियों से पूछताछ कर दर्ज किया गया बयान

Manish Gupta murder case Kanpur SIT reached Gorakhpur for investigation
मनीष हत्याकांड में जांच करने गोरखपुर पहुंची एसआईटी कानपुर। - फोटो : अमर उजाला।

एसआईटी ने घटना की रात मौजूद रहे होटल कृष्णा पैलेस के सभी कर्मचारियों को बुलाकर उनसे भी पूछताछ की है। बारीकी से इस बात को टीम ने समझने की कोशिश की है कि 27 सितंबर की रात में रामगढ़ताल पुलिस कितने बजे जांच को पहुंची थी, कितने पुलिस वाले कमरे में दाखिल हुए थे, पुलिस की मौजूदगी कितने देर तक रही, कमरे में उस समय कौन-कौन गया था, मनीष के दोस्तों से इंस्पेक्टर व दारोगा की क्या बात हुई? इस सवालों का जवाब जानने की कोशिश की गई है। पुलिस इस बात को समझने पर जोर ज्यादा दे रही है कि आखिर उस रात अगर मारपीट हुई तो वह कौन सी बात थी कि इस तरह के हालात हो गए थे।
 
जांच से रामगढ़ताल पुलिस से बनाई गई दूरी
कानपुर एसआईटी के साथ कैंट पुलिस को भेजा गया था। इस पूरे जांच पड़ताल के दौरान रामगढ़ताल पुलिस को जांच से दूर रखा गया है। यहां तक की बाहर की व्यवस्था को भी कैंट पुलिस के हवाले कर दिया गया था। सिर्फ चंद मिनट के लिए रामगढ़ताल थाने के एक दरोगा को सीसी टीवी कैमरे का डीवीआर लेकर बुलाया गया था। उससे यह हासिल करने के बाद लौटा दिया गया।
 
अपर पुलिस आयुक्त की अगुवाई में गठित है कमेटी
एसआईटी का नेतृत्व अपर पुलिस आयुक्त आनंद प्रकाश कर रहे हैं। इसके अलावा एडिशनल डीसीपी वेस्ट बृजेश कुमार श्रीवास्तव, इंस्पेक्टर, फोरेंसिक टीम व अन्य पुलिस वालों के साथ आए हैं। इस केस का मुख्य विवेचक बृजेश कुमार श्रीवास्तव को बनाया गया है।

पत्नी की मांग पर कानपुर को सौंपी गई थी जांच

मृतक मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने गोरखपुर पुलिस पर सवाल खड़ा करते हुए, कानपुर पुलिस से जांच कराने की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री के आदेश पर जांच को कानपुर के हवाले कर दिया गया। कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने जांच को एसआईटी गठित की है, जो शनिवार को गोरखपुर पहुंची थी। हालांकि, गोरखपुर एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने भी केस को थाने से हटाकर क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था, मगर अभी तक गिरफ्तारी को पहल नहीं की गई थी। एसएसपी गोरखपुर ने इस मामले की गिरफ्तारी के लिए चार स्पेशल टीमें गठित कर दीं थीं।
 
औपचारिकता पूरी कर कानपुर को सौंप दी गई विवेचना
रामगढ़ताल थाने में दर्ज हत्या के केस को एसएसपी गोरखपुर ने क्राइम ब्रांच को सौंप दिया था। मगर, अब केस कानपुर ट्रांसफर होने के बाद औपचारिकता पूरी कर विवेचना को कानपुर एसआईटी के हवाले कर दिया गया है। एसआईटी ने गोरखपुर पुलिस द्वारा अब तक की गई जांच के बारे में जानकारी ली है। उसकी मदद भी ली जा रही है।
 
विवेचना कर रहे दिलीप पांडेय से ली गई जानकारी
कानपुर एसआईटी ने अब तक इस केस की विवेचना कर रहे क्राइम ब्रांच गोरखपुर के इंस्पेक्टर दिलीप पांडेय से भी जानकारी हासिल की है। अब तक जांच में मिले तथ्य और अन्य साक्ष्य उनसे लिए गए है। गोरखपुर फोरेंसिक टीम ने भी अपनी जांच रिपोर्ट को एसआईटी से साझा किया है।
 
यह हुआ था
कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर अपने दो दोस्तों हरवीर व प्रदीप के साथ घूमने आए थे। तीनों युवक तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात ही रामगढ़ताल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी प्रभारी रहे अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस वाले आधी रात के बाद होटल में चेकिंग को पहुंच गए थे। कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि पुलिस वालों ने उनकी पिटाई कर दी थी जिससे उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस की ओर से नशे में गिरने से मौत बताया था मगर बाद में केस दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, तब जाकर परिवार के लोग शव लेकर कानपुर रवाना हुए थे।
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