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महंत की हत्या या फिर स्वाभाविक मौत: वाराणसी से लेकर गोरखपुर तक मठ की जमीन पर रार, जल्द सच आएगा सामने

Sat, 02 Sep 2023 02:53 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 02 Sep 2023 02:53 PM IST
सार

महंत हरीश चंद्र पिछले एक साल से विवाद को सोशल मीडिया पर अपडेट कर रहे थे। संतकबीरनगर के महुली थाने में प्रार्थना पत्र देने से लेकर खजुरी में जमीन को लेकर चल रहे विवाद तक को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। लोगों से अपील की कि वे सच्चाई जानें।

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Mahant murder or natural death postmortem will happen only then truth will come out
महंत हौशलादास को लेकर 20 अगस्त को सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

महंत हौशिलादास की मौत कैसे हुई, इसका सच तो खैर पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगा, लेकिन इसकी जड़ में असल विवाद 100 बीघा जमीन का है। वाराणसी, संतकबीरनगर के महुली और गोरखपुर में इसी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है और मामला न्यायालय तक भी पहुंच चुका है।

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जुलाई में न्यायालय के आदेश पर वाराणसी में एक केस भी दर्ज किया गया था। आरोप लगाने वाले महंत हरीश चंद्र दास भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जमीन के लालच में ही महंत की हत्या कर समाधि दे दी गई है।
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महंत हरिशचंद्र दास का आरोप है कि रामप्रसाद ने जबरन महंत हौशिलादास को बंधक बना लिया। 20 अगस्त को ही सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें चारपाई पर सोए हौशिलादास खुद को घासीकटरा पहुंचाने की बात कहते सुने जा रहे हैं। हरीश चंद्र दास का आरोप है कि संत समाज को बिना बताए ही उनको समाधि दी गई है।

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लेकिन आरोपों में घिरे महंत इसे सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि महंत हौशिलादास खुद यहां आए थे। वह उनकी सेवा कर रहे थे और समाज की मौजूदगी में ही उन्हें समाधि दी गई है। खैर मौत की वजह चाहे जो हो, लेकिन पूरे विवाद के पीछे वाराणसी, गोरखपुर और संतकबीरनगर की जमीन ही है।

पूरा विवाद सोशल मीडिया पर मौजूद

महंत हरीश चंद्र पिछले एक साल से विवाद को सोशल मीडिया पर अपडेट कर रहे थे। संतकबीरनगर के महुली थाने में प्रार्थना पत्र देने से लेकर खजुरी में जमीन को लेकर चल रहे विवाद तक को उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। लोगों से अपील की कि वे सच्चाई जानें।
 

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