{"_id":"698a4bb36dc2f9b4ee0c6c81","slug":"mahadev-jharkhandi-crowds-gather-on-mahashivratri-wishes-are-fulfilled-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-1224244-2026-02-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"महादेव झारखंडी: महाशिवरात्रि में उमड़ती है भीड़, पूरी होती है मुराद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महादेव झारखंडी: महाशिवरात्रि में उमड़ती है भीड़, पूरी होती है मुराद
Tue, 10 Feb 2026 02:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 10 Feb 2026 02:33 AM IST
विज्ञापन
गोरखपुर। महानगर के कुनराघाट स्थित महादेव झारखंडी मंदिर में महाशिवरात्रि में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ता है। यहां मत्था टेकने वाले भक्तों की मुरादें भोलेनाथ पूरी करते हैं। मंदिर में महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी पूरी कर ली गई हैं। भगवान भोलेनाथ का शिवलिंग स्वयंभू रूप में स्थापित है। महाशिवरात्रि में यहां मेले जैसा माहौल रहता है।
महादेव झारखंडी मंदिर के पुजारी रविंद्र नाथ ने बताया कि मंदिर के स्थल पर पहले घना जंगल होता था। यहां लकड़हारे लकड़ी काटकर अपना जीवन व्यतीत करते थे। वर्ष 1928 में एक लकड़हारा लकड़ी काट रहा था, तब उसकी कुल्हाड़ी एक पत्थर से टकराई थी, उस जगह पर जमीन से खून निकलने लगा था। पुजारी के मुताबिक, वह शिवलिंग था। लकड़हारे ने शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया लेकिन वह नींचे ही धंसता जा रहा था। लकड़हारे की सूचना पर वहां के जमींदार ने भी शिवलिंग को ऊपर करने की कोशिश की पर असफल रहा। लोगों ने वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी। शिवलिंग हमेशा पत्तों से ढका रहता था, इसलिए इस मंदिर को लोग महादेव झारखंडी के नाम से जानने लगे।
मंदिर की महिमा काफी पुरानी है। यहां स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां रात से ही श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में रंग रोगन व बैरिकेडिंग का कार्य कर दिया गया है।
विज्ञापन
- रविंद्र नाथ, पुजारी, महादेव झारखंडी मंदिर, कुनराघाट
विज्ञापन
महादेव झारखंडी मंदिर के पुजारी रविंद्र नाथ ने बताया कि मंदिर के स्थल पर पहले घना जंगल होता था। यहां लकड़हारे लकड़ी काटकर अपना जीवन व्यतीत करते थे। वर्ष 1928 में एक लकड़हारा लकड़ी काट रहा था, तब उसकी कुल्हाड़ी एक पत्थर से टकराई थी, उस जगह पर जमीन से खून निकलने लगा था। पुजारी के मुताबिक, वह शिवलिंग था। लकड़हारे ने शिवलिंग को निकालने का प्रयास किया लेकिन वह नींचे ही धंसता जा रहा था। लकड़हारे की सूचना पर वहां के जमींदार ने भी शिवलिंग को ऊपर करने की कोशिश की पर असफल रहा। लोगों ने वहां पूजा-अर्चना शुरू कर दी। शिवलिंग हमेशा पत्तों से ढका रहता था, इसलिए इस मंदिर को लोग महादेव झारखंडी के नाम से जानने लगे।
विज्ञापन
मंदिर की महिमा काफी पुरानी है। यहां स्वयंभू शिवलिंग के दर्शन के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। महाशिवरात्रि के दिन यहां रात से ही श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं। मंदिर में रंग रोगन व बैरिकेडिंग का कार्य कर दिया गया है।
विज्ञापन
- रविंद्र नाथ, पुजारी, महादेव झारखंडी मंदिर, कुनराघाट