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इलाज से टूटा अंधविश्वास: डॉक्टरों के सामने छूमंतर हो रही भूत-प्रेत की बाधा, तांत्रिक, बाबाओं से ऊबे लोग

Wed, 10 Aug 2022 03:56 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 10 Aug 2022 03:56 PM IST
सार

डॉ. अमित शाही ने बताया कि शुरू में कई मरीज इलाज पर भरोसा नहीं करते हैं। लेकिन दो से ढाई महीने में जब धीरे-धीरे सुधार होना शुरू होता है। तो झाड़-फूंक के चक्कर से निकलकर इलाज पर भरोसा जताने लगते हैं।

 

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magic of people trapped in web of superstition breaking due to treatment
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : social Media

विस्तार

तांत्रिक, बाबाओं-ओझाओं से ऊबे लोग बीआरडी मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल में दस्तक दे रहे हैं। विभिन्न मानसिक बीमारियों से ग्रसित इन लोगों को दवाओं से राहत पहुंचाकर डॉक्टर भूत, प्रेत, जादू-टोने का तिलिस्म तोड़ रहे हैं। जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग में हर महीने 100 से 120 गंभीर रुप से बीमार मरीज पहुंच रहे हैं।

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जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अमित शाही के अनुसार,  अंधविश्वास के जाल में फंसकर कई लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हैं। तांत्रिक, बाबा, ओझा से आर्थिक रुप से ठगे जाने और बीमारी के बढ़ जाने के बाद मरीज जब अस्पताल पहुंचते हैं तो उन्हें सच्चाई के साथ ही अपनी गलती का एहसास होता है।
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इलाज के बाद राहत मिलने पर उन्हें पता चलता है कि वे किसी भूत-प्रेत, जादू-टोने की बाधा से नहीं बल्कि अवसाद, सिजोफ्रेनिया, हिस्टीरिया, डिमेंशिया जैसी मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं।
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डॉ. अमित शाही के अनुसार, सही समय पर इलाज न मिलने के कारण कई मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। कोई अपने साथ अदृश्य शक्ति होने का दावा करता है तो कोई अजीब हरकतें करने लगता है। आंख बंद करके खुद से बात करना, सिर तेजी से हिलाना, ऐसी चीजे देखने का दावा करना, जो अस्तित्व में हैं ही नहीं, अचानक रोना और फिर हंसने लगना समेत कई अन्य तरह के लक्षणों के लोग इलाज के लिए अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। लक्षणों के आधार पर बीमारी का निर्धारण कर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।

इलाज के बाद हो रहे स्वस्थ
डॉ. अमित शाही ने बताया कि शुरू में कई मरीज इलाज पर भरोसा नहीं करते हैं। लेकिन दो से ढाई महीने में जब धीरे-धीरे सुधार होना शुरू होता है। तो झाड़-फूंक के चक्कर से निकलकर इलाज पर भरोसा जताने लगते हैं।

जिला अस्पताल मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही ने कहा कि मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता का अभाव लोगों को अंधविश्वास की तरफ ढकेल रहा है। यही कारण है कि लोग भ्रम का शिकार होते हैं। ऐसे लोगों की लगातार काउंसिलिंग की जा रही है। इसका असर लोगों में दिख रहा है।
 

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