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Gorakhpur News: मैडम! तीन साल पहले मिला ससुराल में रहने का ऑर्डर, जाने पर बंद कर देते हैं ताला
Wed, 19 Nov 2025 11:23 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 19 Nov 2025 11:23 PM IST
सार
इस दौरान शाहपुर की दिपांशी अपनी समस्या लेकर पहुंचीं। उनका यह कहना था कि तीन साल पहले कोर्ट की तरफ से ऑर्डर मिल चुका था कि अब वो अपने ससुराल में बिना किसी रोक टोक के रह सकती हैं। इसके बाद भी प्रशासन की लापरवाही की वजह से ससुराल वाले घर में रहने नहीं देते हैं।
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विकास भवन के मनरेगा सभागार में महिला कल्याण विभाग द्वारा आयोजित महिला जनसुनवाई और जागरूकता चौपा
विस्तार
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को महिला जनसुनवाई एवं जागरूकता चौपाल का आयोजन किया गया। जनसुनवाई में विभिन्न क्षेत्रों से 27 महिलाएं अपनी समस्याओं को लेकर पहुंची थीं।
इस दौरान शाहपुर की दिपांशी अपनी समस्या लेकर पहुंचीं। उनका यह कहना था कि तीन साल पहले कोर्ट की तरफ से ऑर्डर मिल चुका था कि अब वो अपने ससुराल में बिना किसी रोक टोक के रह सकती हैं। इसके बाद भी प्रशासन की लापरवाही की वजह से ससुराल वाले घर में रहने नहीं देते हैं।
जब भी वहां जाती हैं तो ससुराल वाले घर में ताला लगा देते हैं और घर से बाहर कर देते हैं। इस वजह से काफी समस्या हो रही है। उपाध्यक्ष ने प्रशासन को जल्द से जल्द नियमानुसार प्रक्रिया का पालन कराने का आदेश दिया।
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जनसुनवाई में रोजगार न मिलने से घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद, पारिवारिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, भरण-पोषण सहित अन्य सामाजिक और कानूनी मामलों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। महिलाओं को उनके अधिकारों व उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई।
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इस दौरान शाहपुर की दिपांशी अपनी समस्या लेकर पहुंचीं। उनका यह कहना था कि तीन साल पहले कोर्ट की तरफ से ऑर्डर मिल चुका था कि अब वो अपने ससुराल में बिना किसी रोक टोक के रह सकती हैं। इसके बाद भी प्रशासन की लापरवाही की वजह से ससुराल वाले घर में रहने नहीं देते हैं।
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जब भी वहां जाती हैं तो ससुराल वाले घर में ताला लगा देते हैं और घर से बाहर कर देते हैं। इस वजह से काफी समस्या हो रही है। उपाध्यक्ष ने प्रशासन को जल्द से जल्द नियमानुसार प्रक्रिया का पालन कराने का आदेश दिया।
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जनसुनवाई में रोजगार न मिलने से घरेलू हिंसा, संपत्ति विवाद, पारिवारिक उत्पीड़न, कार्यस्थल पर उत्पीड़न, भरण-पोषण सहित अन्य सामाजिक और कानूनी मामलों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। महिलाओं को उनके अधिकारों व उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में भी जानकारी दी गई।