Locust Attack: पाकिस्तान का टिड्डी दल राजस्थान से लौटा, जानिए फिर गोरखपुर में कहां से आ गया इनका झुंड
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पाकिस्तान से चले टिड्डी किटों का झुंड तो राजस्थान से लौट गया मगर गोरखपुर में अभी भी टिड्डियों का झुंड तबाही मचा रहा है। जिले के सरदारनगर ब्लाक के दर्जनों गांवों में गन्ने की फसल को चाट रहे इन किटों से तंग आकर किसानों ने गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच को जानकारी दी।
ब्लाक के भौवापार गांव के प्रगतिशील किसान राम कृपाल सिंह, रामकल्प चौहान, श्यामचरण, द्वारिका चौधरी, चंद्र भान, जय हिंद मल्ल ने गन्ना किसान संस्थान के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता को फोन कर बताया कि गन्ने की पत्तियों को टिड्डा खा रहे हैं।
सूचना पाकर सहायक निदेशक ने प्रशिक्षण केंद्र की टीम के साथ गांव पहुंचकर फसलों का निरीक्षण किया। उनका कहना है कि यह लोकल यानी स्थानीय स्तर के टिड्डे हैं। मौसम में बदलाव, असमय वर्षा के कारण टिड्डा किटों का प्रकोप गन्ने की फसलों पर बढ़ा है। उन्होंने बताया कि यह कीट हरे व भूरे रंग के होते हैं।
टिड्डी किटों के झुंड से ऐसे बचाए गन्ने की फसल
अक्सर अक्तूबर व नवंबर में मादा टिड्डा, ऊंचे स्थानों पर अंडा देती है, अनुकूल मौसम होने पर जून-जुलाई में इन अंडो से छोटे-छोटे फुदकने वाले टिड्डे निकलते हैं। ये गन्ने के हरे पत्तों को बीच से खा जाते हैं, जिससे गन्ने में भोजन बनाने की प्रक्रिया रूक जाती है और फसल का विकास रुक जाता है। उन्होंने किसानों को इन टिड्डियों से गन्ने की फसल बचाने का उपाय बताने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षण भी दिया।
गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र पिपराइच के सहायक निदेशक ओम प्रकाश गुप्ता ने कहा कि टिड्डा किटों से फसल बचाने के लिए किसानों को फसल की सिंचाई करनी चाहिए। खाली खेत की जुताई करें।
कीटनाशक क्लोरपायरीफास एक लीटर को 500 लीटर पानी में घोलकर फसलों पर छिड़काव करें या नीम का आधा लीटर तेल 500 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करना चाहिए। कोशिश करें सभी किसान अपनी-अपनी फसलों में एक साथ छिड़काव करें।