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अधिवक्ताओं की वकालत पर खतरा: बिना सीओपी 5500 वकील नहीं कर पाएंगे प्रैक्टिस, चैंबर-शेड करना होगा खाली
Sat, 03 Oct 2026 05:09 PM IST
Rohit Singh
पुरुषोत्तम राय, गोरखपुर
पुरुषोत्तम राय, गोरखपुर
Published by: Rohit Singh
Updated Sat, 03 Oct 2026 05:09 PM IST
सार
गोरखपुर सिविल कोर्ट में पंजीकृत 11 हजार में से करीब 5500 अधिवक्ताओं के पास सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस नहीं है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने दो साल बाद भी सीओपी न लेने वाले वकीलों की सूची मांगी है। ऐसे वकीलों को चैंबर, टिन शेड और बस्ता रखने की जगह खाली करनी होगी।
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अधिवक्ता अनुज अस्थाना व मधुसूदन त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पंजीकरण के दो साल बाद भी सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) न लेने वाले गोरखपुर के करीब 5500 अधिवक्ता वकालत नहीं कर पाएंगे। चैंबर, टिन शेड, शेड और बस्ता रखने तक की जगह उन्हें खाली करनी होगी। उनसे जगह खाली करवा कर सीओपीधारी अधिवक्ताओं को दी जाएगी।
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बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट गोरखपुर से सीओपी न लेने वाले वकीलों की सूची मांगी है। सूची के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। बार करउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि दो साल बाद भी सीओपी नहीं लेने वाले अधिवक्ताओं की सूची तैयार कर बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश को उपलब्ध कराई जाए। पत्र की प्रति जिला जज और डीएम को भी भेजी गई है।
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बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर में 11 हजार अधिवक्ता पंजीकृत हैं जिनमें से आधे के पास सीओपी नहीं है। नए अधिवक्ताओं को पंजीकरण कराने के बाद दो साल में सीओपी के लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से आयोजित परीक्षा पास करना अनिवार्य है। हर पांच साल बाद सीओपी का नवीनीकरण्कराना होता है। नवीनीकरण आवेदन के साथ पांच वकालतनामा लगाना अनिवार्य होता है। सीओपीधारी को ही सक्रिय अधिवक्ता माना जाता है।
नए वकीलों सशर्त जारी सीओपी दो साल बाद समाप्त हो जाती है। जिनके पास नई सीओपी पहीं होगी वे वकालत नहीं कर सकेंगे। जबकि जिन पुराने अधिवक्ताओं को पास सीवोपी नहीं होगी उनको डीबार कर दिया जाएगा। बिना सीओपी वकालत करना संभव नहीं होगा: मधुसूदन त्रिपाठी, पूर्व चेयरमैन व वर्तमान सदस्य, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश
बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर में करीब 11 हजार अधिवक्ता पंजीकृत हैं। इनमें से लगभग आधे अधिवक्ताओं के पास अभी सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) कार्ड नहीं है। सीओपी के बिना अधिवक्ताओं को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश और बार एसोसिएशन की ओर से मिलने वाली सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे अधिवक्ताओं को सीओपी बनवाने के लिए गंभीरता से प्रयास करना चाहिए: अनुज अस्थाना, मंत्री, बार एसोसिएशन सिविल कोर्ट, गोरखपुर