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Gorakhpur News: अब गांवों में भी कर सकेंगे तैयारी, 236 गांवों में बन रही डिजिटल लाइब्रेरी
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- 20 ब्लॉक में प्रत्येक लाइब्रेरी पर चार लाख रुपये की लागत से हो रही तैयार
- प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के साथ वाईफाई और कंप्यूटर की मिलने जा रही है सुविधा
- पढ़ाई के लिए टेबल-कुर्सी और शांत वातावरण भी होगा उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। शासन की पहल पर जिले के 20 ब्लॉकों के 236 गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं, जहां छात्र सिविल सर्विसेज समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। इन लाइब्रेरी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि गांव के छात्रों को भी शहरों जैसी पढ़ाई का माहौल मिल सके।
प्रत्येक लाइब्रेरी के निर्माण और व्यवस्था पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें, टेबल-कुर्सियां, अध्ययन के लिए शांत वातावरण और शोध सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए कंप्यूटर और हाई-स्पीड वाईफाई की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे ऑनलाइन सामग्री, ई-बुक और डिजिटल संसाधनों का लाभ उठा सकें। इससे ग्रामीण छात्रों को नवीनतम जानकारी और अध्ययन सामग्री तक आसान पहुंच मिल सकेगी। इस संबंध में डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि शासन स्तर पर 20 ब्लॉकों के 236 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी बनने के बाद छात्र गांव में ही रहकर सिविल सर्विसेज सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाएं। डिजिटल लाइब्रेरी बनने से गांव के युवाओं में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
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- प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबों के साथ वाईफाई और कंप्यूटर की मिलने जा रही है सुविधा
- पढ़ाई के लिए टेबल-कुर्सी और शांत वातावरण भी होगा उपलब्ध
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। शासन की पहल पर जिले के 20 ब्लॉकों के 236 गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की जा रही हैं, जहां छात्र सिविल सर्विसेज समेत अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे। इन लाइब्रेरी को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा ताकि गांव के छात्रों को भी शहरों जैसी पढ़ाई का माहौल मिल सके।
प्रत्येक लाइब्रेरी के निर्माण और व्यवस्था पर करीब चार लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं से संबंधित किताबें, टेबल-कुर्सियां, अध्ययन के लिए शांत वातावरण और शोध सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए कंप्यूटर और हाई-स्पीड वाईफाई की सुविधा भी दी जाएगी, जिससे वे ऑनलाइन सामग्री, ई-बुक और डिजिटल संसाधनों का लाभ उठा सकें। इससे ग्रामीण छात्रों को नवीनतम जानकारी और अध्ययन सामग्री तक आसान पहुंच मिल सकेगी। इस संबंध में डीपीआरओ नीलेश प्रताप सिंह ने बताया कि शासन स्तर पर 20 ब्लॉकों के 236 गांवों का चयन किया गया है। इन गांवों में डिजिटल लाइब्रेरी बनने के बाद छात्र गांव में ही रहकर सिविल सर्विसेज सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर सकेंगे।
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उन्होंने बताया कि इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराना है, ताकि प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में पीछे न रह जाएं। डिजिटल लाइब्रेरी बनने से गांव के युवाओं में पढ़ाई के प्रति रुचि बढ़ेगी और उन्हें अपने सपनों को पूरा करने के लिए बेहतर अवसर मिलेंगे।
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