फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Lessons learned from past experiences, a masterstroke by the Yogi government before 2027

Gorakhpur News: प्रधानों को प्रशासक बनाकर बीजेपी ने बिछाई चुनावी बिसात

Tue, 26 May 2026 02:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 26 May 2026 02:43 AM IST
विज्ञापन
Lessons learned from past experiences, a masterstroke by the Yogi government before 2027
गोरखपुर। पंचायत चुनाव की लेटलतीफी के बीच भाजपा ने पहली बार प्रधानों को ही प्रशासक बनाकर चुनावी बिसात बिछा दी है। योगी सरकार के इस फैसले को चुनावी दृष्टिकोण से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकाें का भी मानना है कि सरकार का यह फैसला मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है क्योंकि प्रधानों में उत्साह बढ़ गया है।
विज्ञापन


दरअसल, प्रदेश में पंचायत चुनाव समय में कराने में सरकार सफल नहीं हो पाई। प्रधान समय से चुनाव न होने पर उन्हें ही प्रशासक बनाने की मांग कर रहे थे। सरकार की ओर से पहले एडीओ पंचायत को प्रशासक के तौर पर नियुक्त करने की परंपरा रही थी। पिछले पंचायत कार्यकाल में भी ऐसी ही नौबत आई थी। तब प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने पर एडीओ को प्रशासक बना दिया गया था। इससे प्रधानों में नाराजगी थी। सरकार के लिए वहअनुभव बेहद ही निराशाजनक रहा।
विज्ञापन

विधानसभा चुनाव में सत्ताधारी दल को उम्मीद के हिसाब से सफलता नहीं मिली। सत्ता वापसी के बावजूद सीटें घट गईं। माना गया कि तत्कालीन प्रधानों का भी सहयोग नहीं मिला। इस बार सरकार उस अनुभव से सबक लेती नजर आई। सीएम योगी आदित्यनाथ ने समय पर चुनाव न कराने के हालात बनते ही प्रधानों को प्रशासक बना दिया। इसका साफ संकेत सामने आया। प्रधानों ने इस फैसले का स्वागत किया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के राजनीति विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर एवं राजनीतिक विश्लेषक अमित मिश्रा कहते हैं, सरकार के इस फैसले का बहुत ही सकारात्मक असर गांवों में होगा। गांवों में चलने वाली योजनाओं की गति मिलेगी और बजट खर्च करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। जनता में प्रधान की पकड़ सीधी होती है और वे जनता से ही चुनकर आते हैं इसलिए लोगों का भरोसा भी उन पर ज्यादा होता है। लिहाजा गांवों में सरकार के प्रति अगर कोई नाराजगी है तो वह भी दूर होगी।
इसके उलट पिछली बार पर गौर करें तो बहुत सारी पंचायतों में धन का बंदरबांट हुआ और कई गांवों में आवंटित बजट खर्च ही नहीं हुआ। इससे नकारात्मक छवि बनी। लेकिन प्रशासक बने रहने के बाद प्रधान प्राथमिकता के तौर पर कार्यों को पूरा करा सकेंगे तो इसका सीधा राजनीतिक लाभ भाजपा को मिल सकता है।
प्रधान से बेहतर काम कोई नहीं करा सकता
पंचायत चुनाव टलने की मूल वजह नौकरशाह हैं। पिछले चुनाव के पहले जब एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया गया था तो बड़े घोटाले हुए। गांव में प्रधान से बेहतर काम कोई नहीं करा सकता है। सरकार के फैसले से गांवों में सकारात्मक माहौल बनेगा। जो भी कमियां रह गई हैं उसे पूरा करने का मौका भी हमें मिलेगा।
सत्यपाल सिंह, अध्यक्ष राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन

1294 ग्राम पंचायतों की कमान रहेगी प्रधान के ही हवाले
जिले में 1294 ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों में 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पंचायतों में चल रही विकास योजनाओं के प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा था। लेकिन सरकार के फैसले से प्रधान खुश हैं क्योंकि छह माह तक गांव की कमान उन्हीं के हाथों में रहेगी।


बोले प्रधान


सरकार का यह फैसला जनकल्याणकारी है। इससे गांव के विकास कार्यों को और गति मिलेगी।अधूरे कार्य पूरे होंगे। आगे बजट की मांग की जा सकती है जिससे और भी योजनाओं को पूरा किया जा सकता है।


- प्रमोद यादव, ग्राम प्रधान कल्याणपुर, विकास खंड भरोहिया




मौजूदा सरकार में पंचायतों को सबसे अधिक धन आवंटित हुआ है और गांवों का विकास तेजी से हुआ है। गांव में अधूरे पड़े विकास कार्य पूरे किए जाएंगे। इससे पंचायतों को नई पहचान मिलेगी। सरकार के इस फैसले का स्वागत है।
- सिद्धू पासवान, ग्राम प्रधान गावां, विकास खंड भटहट
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed