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Gorakhpur News: गोरखपुर जिले की 12.34 लाख की आबादी में खोजे जा रहे कुष्ठ रोगी, निगरानी अभियान शुरू
Thu, 23 Feb 2023 03:10 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 23 Feb 2023 03:10 PM IST
सार
जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता ने बताया कि स्क्रीनिंग में जुटी टीम के प्रत्येक कार्यकर्ता को अभियान के बाद 1000 रुपये देने का प्रावधान है। इसके अलावा अगर आशा कार्यकर्ता नया कुष्ठ रोगी ढूंढती हैं तो उन्हें 250 रुपये दिए जाएंगे, लेकिन अगर वह कुष्ठ रोगी दिव्यांग हो तो मात्र 200 रुपये दिये जाएंगे।
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कुष्ठ रोग
- फोटो : डेमो
विस्तार
गोरखपुर जिले में 12.34 लाख की आबादी के बीच से नए कुष्ठ रोगियों को खोजने का अभियान शुरू किया गया है। जिला कुष्ठ रोग अधिकारी डॉ. गणेश प्रसाद यादव ने भटहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) से बुधवार को इस अभियान की शुरुआत की।
जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि शीघ्र पहचान और इलाज से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। लोगों को चाहिए कि अगर शरीर पर कहीं भी सुन्नपन, दाग या धब्बा हो जिसका रंग चमड़ी के रंग से हल्का हो तो टीम से स्क्रीनिंग अवश्य करवाएं।
बताया कि पीबी रोगी छह माह के इलाज में ठीक हो जाते हैं, जबकि एमबी रोगी का इलाज 12 माह तक चलता है। 131 सुपरवाइजर की देखरेख में 1311 टीम फरवरी और पूरे मार्च माह में नए कुष्ठ रोगियों को खोजेंगी। भटहट सीएचसी के अधीक्षक डॉ अश्वनी चौरसिया ने बताया कि कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों का जागरूक किया जा चुका है। इस दौरान डॉ. भोला गुप्ता, कार्यक्रम से जुड़े रतनराल श्रीवास्तव, महेंद्र चौहान और आसिफ खां की टीम मौजूद रहीं।
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प्रत्येक कार्यकर्ता को 1000 रुपये
जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता ने बताया कि स्क्रीनिंग में जुटी टीम के प्रत्येक कार्यकर्ता को अभियान के बाद 1000 रुपये देने का प्रावधान है। इसके अलावा अगर आशा कार्यकर्ता नया कुष्ठ रोगी ढूंढती हैं तो उन्हें 250 रुपये दिए जाएंगे, लेकिन अगर वह कुष्ठ रोगी दिव्यांग हो तो मात्र 200 रुपये दिये जाएंगे। पीबी कुष्ठ रोगी का इलाज पूरा करवाने पर आशा कार्यकर्ता को 400 रुपये, जबकि एमबी कुष्ठ रोगी का इलाज पूरा करवाने पर 600 रुपये दिए जाएंगे।
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जिला कुष्ठ रोग अधिकारी ने बताया कि शीघ्र पहचान और इलाज से कुष्ठ रोग ठीक हो जाता है। लोगों को चाहिए कि अगर शरीर पर कहीं भी सुन्नपन, दाग या धब्बा हो जिसका रंग चमड़ी के रंग से हल्का हो तो टीम से स्क्रीनिंग अवश्य करवाएं।
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बताया कि पीबी रोगी छह माह के इलाज में ठीक हो जाते हैं, जबकि एमबी रोगी का इलाज 12 माह तक चलता है। 131 सुपरवाइजर की देखरेख में 1311 टीम फरवरी और पूरे मार्च माह में नए कुष्ठ रोगियों को खोजेंगी। भटहट सीएचसी के अधीक्षक डॉ अश्वनी चौरसिया ने बताया कि कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों का जागरूक किया जा चुका है। इस दौरान डॉ. भोला गुप्ता, कार्यक्रम से जुड़े रतनराल श्रीवास्तव, महेंद्र चौहान और आसिफ खां की टीम मौजूद रहीं।
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प्रत्येक कार्यकर्ता को 1000 रुपये
जिला कुष्ठ रोग परामर्शदाता ने बताया कि स्क्रीनिंग में जुटी टीम के प्रत्येक कार्यकर्ता को अभियान के बाद 1000 रुपये देने का प्रावधान है। इसके अलावा अगर आशा कार्यकर्ता नया कुष्ठ रोगी ढूंढती हैं तो उन्हें 250 रुपये दिए जाएंगे, लेकिन अगर वह कुष्ठ रोगी दिव्यांग हो तो मात्र 200 रुपये दिये जाएंगे। पीबी कुष्ठ रोगी का इलाज पूरा करवाने पर आशा कार्यकर्ता को 400 रुपये, जबकि एमबी कुष्ठ रोगी का इलाज पूरा करवाने पर 600 रुपये दिए जाएंगे।