Gorakhpur News: बीच में इलाज छोड़ा और बन गए सामान्य से गंभीर टीबी मरीज
सीएमओ ने जिला क्षय रोग विभाग को निर्देश दिया है कि 2025 तक हर हाल में जिले को टीबी मुक्त करना है। ऐसे में एमडीआर मरीजों का पता लगाकर उनकी जांच कराएं। क्योंकि, ये मरीज ज्यादा खतरनाक होते हैं। एक एमडीआर मरीज 15 से 20 सामान्य नागरिकों को टीबी दे सकता है।
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बिना डिग्री वाले से इलाज और बीच में दवा छोड़ देने से टीबी के सामान्य मरीज भी गंभीर हो जा रहे हैं। डॉक्टरों की भाषा में इसे मल्टी ड्रग रेसिस्टेंट (एमडीआर) का मरीज कहा जाता है। ऐसे मरीजों की संख्या जिले में लगातार बढ़ती जा रही है।
इनमें 306 ऐसे सामान्य टीबी के मरीज थे, जो अब एमडीआर के मरीज बन गए हैं। इनमें हड्डी के 100, ब्रेन के 12 और गांठ टीबी के 70 से अधिक मरीज शामिल हैं। ये मरीज पहले सामान्य श्रेणी के थे, अब इनका इलाज पूरी जिंदगी चलेगा। दवा छोड़ने पर इन मरीजों की मौत भी हो सकती है।
चेस्ट रोग विशेषज्ञ और सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे ने बताया कि एमडीआर मरीजों पर टीबी की सामान्य दवाएं काम नहीं करती हैं। अप्रशिक्षित चिकित्सक के चक्कर में भी पड़कर सामान्य टीबी मरीज एमडीआर हो जा रहे हैं। जांच में ये बातें सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि जब टीबी मरीज जांच नहीं करवाते हैं और अप्रशिक्षित चिकित्सक के चक्कर में पड़ते हैं या फिर अपने मन से लाक्षणिक दवाएं लेते हैं तो उनके एमडीआर होने का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। इलाज के दौरान बिना कोर्स पूरा हुए दवा बंद कर देना, अनियमित तौर पर दवाएं लेना, बार-बार दवा बदलना और नियमित तौर पर आवश्यक जांच न करवाना भी एक सामान्य टीबी मरीज को एमडीआर बना देता है।
उन्होंने बताया कि जिले में पहले 250 एमडीआर टीबी रोगी थे, जो बढ़कर 306 हो गए हैं। जिले में कुल 7,818 टीबी मरीज हैं।
एमडीआर मरीजों में दवा का एडवर्स इफेक्ट ज्यादा
सीमएओ ने बताया कि एमडीआर मरीजों का इलाज बेहद कठिन हो जाता है। उनकी दवा में एडवर्स इफेक्ट भी ज्यादा देखने को मिलते हैं। मृत्यु दर भी इन मरीजों में ज्यादा देखी गई है। एचआईवी और मधुमेह वाले एमडीआर मरीज ज्यादा खतरे में होते हैं। ऐसे में बिना डॉक्टर के सलाह के दवा न छोड़ें।
जांच कराकर एमडीआर मरीजों का लगाएं पता
सीएमओ ने जिला क्षय रोग विभाग को निर्देश दिया है कि 2025 तक हर हाल में जिले को टीबी मुक्त करना है। ऐसे में एमडीआर मरीजों का पता लगाकर उनकी जांच कराएं। क्योंकि, ये मरीज ज्यादा खतरनाक होते हैं। एक एमडीआर मरीज 15 से 20 सामान्य नागरिकों को टीबी दे सकता है। उन्होंने बताया कि 49 डेजिगनेटेड माइक्रोस्कोपी सेंटर (डीएमसी) हैं, जहां एमडीआर जांच की जाती है।