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Gorakhpur News: तीन बार देरी से आने पर अवकाश कटौती, चौथी बार में अनुशासनात्मक कार्रवाई
Tue, 10 Sep 2024 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 10 Sep 2024 03:00 AM IST
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- कर्मचारियों के देरी से आने पर जारी हुआ फरमान
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में देरी से आने पर अब कर्मचारियों को दिक्कत हो सकती है। अब एक दिन देर से आने पर मौखिक, दो दिन पर लिखित चेतावनी और तीसरे दिन भी देर से आए तो एक दिन के आकस्मिक अवकाश की कटौती की जाएगी। चार दिन देर से आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसको लेकर आदेश जारी किया है। जिसे लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रशासनिक भवन समेत अन्य विभागों एवं अनुभागों कार्यरत कई कर्मचारी निर्धारित समय से विलंब से पहुंचते हैं। इससे संबंधित विभागों का कार्य बाधित होता है। शासन की ओर से वर्ष 1975 में दी गई व्यवस्था एवं कुलपति के निर्देश पर देर से पहुंचने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
विश्वविद्यालय में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी मिलाकर करीब पौने चार सौ कर्मचारी हैं। इनमें से दर्जन भर कर्मचारी लेट-लतीफी और बीच की अवधि में गायब होने के लिए चर्चित हैं। माना जा रहा है कि इसे देखते हुए यह आदेश जारी किया गया है। सुबह 10 से 5 बजे तक कार्यालय खुलने का समय है। दोपहर में दो से ढाई बजे तक लंच का समय है। कर्मचारियों की लेट-लतीफी को एक महीने की अवधि के मानक पर परखा जाएगा।
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कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने बताया कि कुछ कर्मचारियों की लेट-लतीफी या बीच में गायब हो जाने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। लेटलतीफ कर्मियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में देरी से आने पर अब कर्मचारियों को दिक्कत हो सकती है। अब एक दिन देर से आने पर मौखिक, दो दिन पर लिखित चेतावनी और तीसरे दिन भी देर से आए तो एक दिन के आकस्मिक अवकाश की कटौती की जाएगी। चार दिन देर से आने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसको लेकर आदेश जारी किया है। जिसे लेकर काफी चर्चाएं हो रही हैं। आदेश में कहा गया है कि प्रशासनिक भवन समेत अन्य विभागों एवं अनुभागों कार्यरत कई कर्मचारी निर्धारित समय से विलंब से पहुंचते हैं। इससे संबंधित विभागों का कार्य बाधित होता है। शासन की ओर से वर्ष 1975 में दी गई व्यवस्था एवं कुलपति के निर्देश पर देर से पहुंचने वाले कर्मचारियों पर कार्रवाई का निर्णय लिया गया है।
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विश्वविद्यालय में तृतीय व चतुर्थ श्रेणी मिलाकर करीब पौने चार सौ कर्मचारी हैं। इनमें से दर्जन भर कर्मचारी लेट-लतीफी और बीच की अवधि में गायब होने के लिए चर्चित हैं। माना जा रहा है कि इसे देखते हुए यह आदेश जारी किया गया है। सुबह 10 से 5 बजे तक कार्यालय खुलने का समय है। दोपहर में दो से ढाई बजे तक लंच का समय है। कर्मचारियों की लेट-लतीफी को एक महीने की अवधि के मानक पर परखा जाएगा।
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कुलसचिव प्रो. शांतनु रस्तोगी ने बताया कि कुछ कर्मचारियों की लेट-लतीफी या बीच में गायब हो जाने से कार्य प्रभावित होता है। इसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। लेटलतीफ कर्मियों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।