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सॉफ्टवेयर बताएगा कौन सी फसल देगी ज्यादा पैदावार, जानें कैसे मिलेगा लाभ?

Sat, 26 Sep 2020 08:58 AM IST
vivek shukla राजन राय, गोरखपुर
राजन राय, गोरखपुर Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Sep 2020 08:58 AM IST
सार

  • मिट्टी की नमी, उर्वरक से जान सकेंगे खेतों की उपयोगिता
  • एमएमएमयूटी विकसित कर रहा है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड मॉडल

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Learn from software high yielding crops according to soil Gorakhpur News Uttar Pradesh
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब सॉफ्टवेयर से जान सकेंगे कि खेतों में मिट्टी के मुताबिक ज्यादा उपज वाली फसलें कौन सी होंगी। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड एक ऐसा मॉडल तैयार कर रहा है, जो मिट्टी के हिसाब से ज्यादा उपज वाली फसलों की जानकारी देगा।

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यह सॉफ्टवेयर रबी और खरीफ की फसलों के हिसाब से किसान को उनके मोबाइल पर ही सूचना भेज देगा। यही नहीं, किसानों को यह भी बताएगा कि उनके खेत में कब-कब पानी और कितने खाद की जरूरत है। इससे किसान की खेती में लागत तो कम आएगी ही, मुनाफा भी बढ़ेगा।
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एमएमएमयूटी ने इस प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू कर दिया है। इसमें कृषि विकास केंद्र की भी मदद ली जा रही है। शोधार्थी और शिक्षक पिछले दस सालों की फसल का ब्यौरा जुटा रहे हैं। मसलन, पूर्वांचल में कौन-कौन सी मुख्य फसलें हैं और उसका औसत उत्पादन कितना है? इसे सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जाएगा। इसके बाद ऑनलाइन उपलब्ध डेटा से मिलान कर इसे परखा जाएगा।
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ऐसे होगी जांच

इस प्रोजेक्ट के कोआर्डिनेटर प्रो. एसके सोनी हैं। उन्होंने बताया कि खेत से मिट्टी लेकर लैब में नमी, उर्वरक, बीज के बढ़ने की क्षमता आदि की जांच करेंगे। इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड सॉफ्टवेयर में उसे अपलोड किया जाएगा। सॉफ्टवेयर ऑनलाइन मौसम के डेटा और फसल के डेटा को रिसर्च कर बता देगा कि मिट्टी में किस महीने में कौन सी फसल की बुवाई करें तो सर्वाधिक उत्पादन होगा।

मिट्टी की जांच के लिए होगी लैब की सुविधा  
एमएमएमयूटी मिट्टी की जांच के लिए लैब भी स्थापित करने जा रहा है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। विश्वविद्यालय अपने शोध में इस लैब का इस्तेमाल तो करेगा ही किसानों के खेत की मिट्टी की जांच भी निशुल्क करेगा। रोजाना 50 नमूने जांचें जाएंगे। जिन नमूनों की जांच होगी उनका ब्यौरा लैब में सुरक्षित रखा जाएगा और उसे सॉफ्टवेयर से लिंक कर देंगे।

कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि इस वर्ष के अंत तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित मॉडल पर काम शुरू हो जाएगा। किसानों के लिए यह बहुत ही कारगर साबित होगा। इससे खेत में ज्यादा सिंचाई और ज्यादा मात्रा में उर्वरक डालने की जरूरत नहीं पड़ेगी। साथ ही अधिक उत्पादन वाली फसल की बुवाई करेंगे तो किसानों को मुनाफा भी ज्यादा होगा।
 

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