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जिपं अध्यक्ष चुनाव: अपने सदस्य तो दूर, प्रत्याशी तक को नहीं साध सकी समाजवादी पार्टी, जानिए क्या है पूरा मामला
Sun, 27 Jun 2021 12:44 PM IST
vivek shukla
अरुण चन्द, गोरखपुर।
अरुण चन्द, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 27 Jun 2021 12:44 PM IST
सार
न खुद ठोस रणनीति बना सके पार्टी नेता और न ही भाजपा की रणनीति ही भांप सके
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर में चुनाव मैदान में बिना लड़े ही औंधे मुंह गिरी समाजवादी पार्टी, जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर लगातार दूसरी बार कब्जा जमाए रखने के लिए न तो कोई ठोस रणनीति ही बना सकी और न ही भाजपा की रणनीति को भांप सकने में ही कामयाब रही। पार्टी अपने निर्वाचित जिला पंचायत सदस्य तो दूर, प्रत्याशी तक को नहीं साध सकी। इसी का नतीजा रहा कि पार्टी आलाकमान ने जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी को शनिवार शाम को ही पद से हटाने का फरमान जारी कर दिया।
सपा की तरफ से अधिकृत प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता ने नामांकन से किनारा कर लिया तो दूसरे विकल्प के तौर पर चुने गए, धर्मेंद्र यादव ने भी साथ छोड़ दिया। शुक्रवार की रात भर धर्मेंद्र की तलाश के बाद भी जब वे नहीं मिले तो इज्जत बचाने के लिए पार्टी ने नामांकन के ठीक एक घंटे पहले वार्ड नंबर 47 से निर्वाचित जितेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित किया।
जितेंद्र दो दिन से नामांकन पत्र तक नहीं हासिल कर सके थे। बड़ी मुश्किल से प्रस्तावक व अनुमोदक की तलाश हो सकी, मगर फिर भी सपा नामांकन तक नहीं दाखिल कर सकी। चर्चा है कि 68 सीट वाली जिला पंचायत के 55 से अधिक सदस्य भाजपा के पक्ष में चले गए थे। सपा के आठ जिला पंचायत सदस्यों ने सीधे तौर पर भाजपा प्रत्याशी को वोट देने का भरोसा दिलाया था।
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यह भी चर्चा है कि पार्टी की तरफ से घोषित ज्यादातर जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा होने के पहले ही पाला बदल चुके थे और जिलाध्यक्ष समेत पार्टी के अन्य बड़े पदाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पार्टी के घोषित प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता और धर्मेंद्र यादव को भी साधने में भाजपा कामयाब रही है। नतीजा यह रहा कि उन्होंने ऐन मौके पर मैदान छोड़कर सपा को सोचने समझने या फिर नई रणनीति बनाने का मौका तक नहीं दिया। नए प्रत्याशी के लिए राजनीतिक गोटी सेट करने तक का समय नहीं मिल सका। सिर्फ इज्जत बचाने के लिए जितेंद्र यादव का नाम घोषित किया, फिर उन्हें लेकर नामांकन कराने पहुंच गए।
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सपा की तरफ से अधिकृत प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता ने नामांकन से किनारा कर लिया तो दूसरे विकल्प के तौर पर चुने गए, धर्मेंद्र यादव ने भी साथ छोड़ दिया। शुक्रवार की रात भर धर्मेंद्र की तलाश के बाद भी जब वे नहीं मिले तो इज्जत बचाने के लिए पार्टी ने नामांकन के ठीक एक घंटे पहले वार्ड नंबर 47 से निर्वाचित जितेंद्र यादव को प्रत्याशी घोषित किया।
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जितेंद्र दो दिन से नामांकन पत्र तक नहीं हासिल कर सके थे। बड़ी मुश्किल से प्रस्तावक व अनुमोदक की तलाश हो सकी, मगर फिर भी सपा नामांकन तक नहीं दाखिल कर सकी। चर्चा है कि 68 सीट वाली जिला पंचायत के 55 से अधिक सदस्य भाजपा के पक्ष में चले गए थे। सपा के आठ जिला पंचायत सदस्यों ने सीधे तौर पर भाजपा प्रत्याशी को वोट देने का भरोसा दिलाया था।
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यह भी चर्चा है कि पार्टी की तरफ से घोषित ज्यादातर जिला पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की घोषणा होने के पहले ही पाला बदल चुके थे और जिलाध्यक्ष समेत पार्टी के अन्य बड़े पदाधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। पार्टी के घोषित प्रत्याशी आलोक कुमार गुप्ता और धर्मेंद्र यादव को भी साधने में भाजपा कामयाब रही है। नतीजा यह रहा कि उन्होंने ऐन मौके पर मैदान छोड़कर सपा को सोचने समझने या फिर नई रणनीति बनाने का मौका तक नहीं दिया। नए प्रत्याशी के लिए राजनीतिक गोटी सेट करने तक का समय नहीं मिल सका। सिर्फ इज्जत बचाने के लिए जितेंद्र यादव का नाम घोषित किया, फिर उन्हें लेकर नामांकन कराने पहुंच गए।
निर्दलियों को भी नहीं साध सके
सपा कार्यकर्ता को कलेक्ट्रेट से बाहर करती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
भाजपा की किलेबंदी भेद पाने में खुद को असफल पा रहे, सपा नेताओं में नामांकन के पहले ही जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचने की लालसा खत्म होती दिख गई थी। बहुमत के लिए भाजपा के सदस्यों का दरवाजा खटखटाने की कोशिश तो दूर निर्दल जीतने वालों से भी उस गंभीरता से वार्ता नहीं हुई, जैसी होनी चाहिए थी। ज्यादातर निर्दलीय सपा से दूर थे।
गायब दिखा तेवर, गाड़ी तक से नहीं उतरे जिलाध्यक्ष
नामांकन के लिए जा रहे सपा प्रत्याशी जितेंद्र यादव और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पार्टी कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट के बीच कई बार रोका। शास्त्री चौक के पास तो उन्हें दो घंटे तक रोके रखा गया। इस दौरान जिलाध्यक्ष नगीना साहनी, पार्टी प्रत्याशी जितेंद्र के साथ ही गाड़ी में बैठे रहे और नीचे उतरकर विरोध जताने तक की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा। दो घंटे बाद जब एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट आए तब वे गाड़ी से उतरकर कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़े। इस दौरान पार्टी जिस तेवर के लिए जानी जाती है, वह पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं में पूरी तरह से गायब दिखा। नामांकन कक्ष तक नहीं जाने देने को लेकर मुट्ठी भर ही कार्यकर्ता शास्त्री चौक पर पुलिस से बहस कर रहे थे। पार्टी के बड़े और पुराने नेता पीछे खामोश खड़े आपस में गुफ्तगू कर रहे थे।
समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने भले ही जिलाध्यक्ष के पद से हटा दिया है। मगर मैं कल भी निष्ठावान कार्यकर्ता था, आज भी हूं और आगे भी रहूंगा। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला है, उनका निर्णय सर्वमान्य है।
गायब दिखा तेवर, गाड़ी तक से नहीं उतरे जिलाध्यक्ष
नामांकन के लिए जा रहे सपा प्रत्याशी जितेंद्र यादव और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पार्टी कार्यालय से लेकर कलेक्ट्रेट के बीच कई बार रोका। शास्त्री चौक के पास तो उन्हें दो घंटे तक रोके रखा गया। इस दौरान जिलाध्यक्ष नगीना साहनी, पार्टी प्रत्याशी जितेंद्र के साथ ही गाड़ी में बैठे रहे और नीचे उतरकर विरोध जताने तक की जहमत उठाना जरूरी नहीं समझा। दो घंटे बाद जब एडीएम और सिटी मजिस्ट्रेट आए तब वे गाड़ी से उतरकर कलेक्ट्रेट की तरफ बढ़े। इस दौरान पार्टी जिस तेवर के लिए जानी जाती है, वह पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं में पूरी तरह से गायब दिखा। नामांकन कक्ष तक नहीं जाने देने को लेकर मुट्ठी भर ही कार्यकर्ता शास्त्री चौक पर पुलिस से बहस कर रहे थे। पार्टी के बड़े और पुराने नेता पीछे खामोश खड़े आपस में गुफ्तगू कर रहे थे।
समाजवादी पार्टी के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नगीना प्रसाद साहनी ने बताया कि पार्टी नेतृत्व ने भले ही जिलाध्यक्ष के पद से हटा दिया है। मगर मैं कल भी निष्ठावान कार्यकर्ता था, आज भी हूं और आगे भी रहूंगा। यह राष्ट्रीय अध्यक्ष का फैसला है, उनका निर्णय सर्वमान्य है।