EXCLUSIVE: नीर निकुंज वाटर पार्क के साझेदारों के खिलाफ दर्ज मुकदमा खत्म, हाईकोर्ट ने केस बंद करने का दिया आदेश
- कैंट पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट लगाई और हाईकोर्ट ने केस बंद करने का आदेश दिया
- जीडीए ने वाटर पार्क के कुछ हिस्से को सील करके कराया था आठ साझेदारों के खिलाफ मुकदमा
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गोरखपुर नीर निकुंज वाटर पार्क मामले में आठ साझेदारों के खिलाफ कैंट थाने में दर्ज मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट (एफआर) लगा दी गई है। पांच फरवरी की अंतिम रिपोर्ट में कहा गया कि विवेचना के दौरान सील तोड़ने, वाटर पार्क के गलत इस्तेमाल सहित तमाम आरोपों के संदर्भ में कोई साक्ष्य नहीं पाए। लिहाजा, मुकदमा समाप्त किया जाता है।
यही रिपोर्ट इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी। इसी आधार पर जस्टिस प्रिथिंकर दिवाकर और जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने गत 23 फरवरी 2021 को केस बंद करने का आदेश दिया है। अब वाटर पार्क के साझेदारों की तरफ से गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) के अफसरों के खिलाफ झूठी सूचना देने और मानहानि का मामला दर्ज कराने की बात कही गई है।
जीडीए के अवर अभियंता रमापति वर्मा की तहरीर पर 17 जून 2019 को वाटर पार्क के साझेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी व गलत तरीके से दस्तावेज तैयार करने सहित छह धाराओं में केस दर्ज किया गया था। आरोप था कि वाटर पार्क के साझेदारों ने वैवाहिक मंडप की सील तोड़ी और कार्यक्रम कराया। इसका विरोध करने गए जीडीए अफसर व कर्मचारियों के काम में बाधा भी डाली।
पार्क की लीज डीड में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए। इस मामले में आरोपी बनाई गईं आरती अग्रवाल व चार अन्य ने मुकदमे को साजिश का हिस्सा बताया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करके मुकदमा निरस्त करने की मांग कर दी। हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की विवेचना तेजी से कराई गई। अब अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई है।
नीर निकुंज वाटर पार्क के साझेदार दीपक अग्रवाल का कहना है कि जीडीए के अफसरों ने साजिशन आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। अब पुलिस ने मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी है। हाईकोर्ट ने भी केस बंद करने का आदेश दिया है। एक साल आठ महीने तक साझेदारों को कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। सबकी प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। आर्थिक व मानसिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ा है।
विवेचना से ये तथ्य सामने आए
- छह मार्च 2019 को हाईकोर्ट के आदेश पर सात से नौ मार्च तक नीर निकुंज वाटर पार्क के वैवाहिक मंडप की सील खोली गई। साथ ही हर कार्यक्रम के हिसाब से 25-25 हजार रुपये शुल्क विकास प्राधिकरण में जमा कराके विवाह संपन्न कराया गया।
- जीडीए ने 10 मार्च 2019 को वैवाहिक मंडप को फिर सील कर दिया।
- सील भाग को छोड़कर बाकी हिस्से में सामान्य तरीके से काम चलता पाया गया।
- आसपास के लोगों से बात की गई तो पता चला कि 10 मार्च 2019 के बाद सील भाग कभी खोला ही नहीं गया।
- 15 व 17 मार्च को जो वैवाहिक कार्यक्रम हुए, वह सील भाग को छोड़कर टेंट लगाकर करवाए गए।
- जीडीए के अधिकारी व कर्मचारियों से वाटर पार्क के साझेदारों का आमना-सामना नहीं हुआ। पत्राचार ही किए गए।
- वादी, गवाह, घटना स्थल के निरीक्षण व अभिलेखों के अवलोकन, परिसीलन के दौरान कोई साक्ष्य नहीं मिले।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ था मुकदमा
रोहित अग्रवाल, अर्जुन वालानी, दिनेश कुमार वालानी, आरती अग्रवाल, दीपक अग्रवाल, श्याम बिहारी अग्रवाल, अनुज अग्रवाल और अभिषेक अग्रवाल।
छह विवेचकों ने की पड़ताल
कैंट थाने में मुकदमा दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना उप निरीक्षक राजेंद्र कुमार सिंह ने की थी, फिर अलग-अलग विवेचक आए। उप निरीक्षक प्रमोद कुमार शुक्ला, इत्यानंद पांडेय, ब्रह्मा कुमार उपाध्याय, वरुण सांस्कृत व एक अन्य।
झूठी सूचना देने का मामला दर्ज करा सकते हैं साझेदार
नीर निकुंज वाटर पार्क के साझेदार अब जीडीए अफसरों के खिलाफ आईपीसी की धारा-177 (झूठी सूचना देना) के तहत कार्रवाई कर सकते हैं। इसमें छह महीने की सजा या जुर्माना, सजा के साथ जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
जीडीए सचिव राम सिंह गौतम ने कहा कि जीडीए उपाध्यक्ष के आदेश पर केस दर्ज कराया गया था। वैवाहिक स्थल की सील तोड़ी गई थी, इसके साक्ष्य हैं। पुलिस ने क्या रिपोर्ट लगाई है, इसकी जानकारी नहीं है। इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी नहीं मिली है। हाईकोर्ट का जो भी आदेश होगा, उसका अनुपालन सुनिश्चित कराया जाएगा। वाटर पार्क परिसर में संचालित पांच वैवाहिक स्थलों को सील किए जाने का आदेश अभी तक प्रभावी है। इसमें किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है।