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40 करोड़ के लिए रात 12 बजे तक जूझते और हांफते रहे सैकड़ों प्रधान, झुनझुना साबित हुआ इनका डोंगल

Sat, 26 Dec 2020 02:00 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 26 Dec 2020 02:00 PM IST
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Last day of Panchayat village head upset for dongle in gorakhpur
कार्यकाल के आखिरी दिन सर्वर ने और रुलाया - फोटो : अमर उजाला।
पांच साल के कार्यकाल का आखिरी दिन तमाम प्रधानों के लिए तब और भारी महसूस हुआ जब वे पंचम राज्य वित्त और ग्राम निधि -6 के खातों में करीब 35 से 40 करोड़ रुपये मौजूद रहने के बाद भी भुगतान नहीं कर सके। गुरुवार को आधी रात तक ब्लाकों और विकास भवन पर जमे रहने के बाद शुक्रवार को उनकी मुश्किलें और बढ़ गई।
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छुट्टी की वजह से न केवल दफ्तर बंद रहे बल्कि सर्वर पहले की तुलना में और धीमा हो गया। हाथ में मौजूद डोंगल झुनझुना साबित हुआ। पूरे दिन प्रधान ऑपरेटर के घरों पर जाकर उनकी मनुहार करते रहे। कुछ ने सचिवों से गुहार लगाई और उन्हें संबंधों का हवाला देकर रात 12 बजे तक जगाए रखा। पूरे दिन जूझने के बाद सफलता हाथ लगने पर कुछ प्रधानों के चेहरे खिल गए तो ज्यादातर रात में मायूस होकर बिस्तर तक पहुंचे।
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दरअसल सभी प्रधानों को पीएफएमएस के जरिए भुगतान के लिए डोंगल दिया गया है। डोंगल से ही वह ग्राम पंचायत के खातों से ऑनलाइन धन का भुगतान करते हैं। मगर ज्यादातर प्रधान इसे संचालित ही नहीं कर पाते हैं। यही वजह कि भुगतान के लिए वे शुक्रवार केे अपने कार्यकाल के आखिरी वक्त तक ब्लॉक और मुख्यालय पर तैनात कंप्यूटर आपरेटरों व सचिवों पर निर्भर रहे। उधर सर्वर ने अलग परेशान किया।
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कल तक पता चल सकेगा खाते से कितनी निकासी, कितना बाकी : डीपीआरओ

गुरुवार को देर रात तक विकास भवन पर प्रधानों और प्रधान प्रतिनिधियों का जमावड़ा देख सीडीओ ने शुक्रवार को छुट्टी के बाद भी विकास भवन का मुख्य द्वार ही बंद करा दिया। ज्यादातर ब्लाकों पर भी कार्यालय बंद रहे जिससे रात 12 बजे तक बड़ी संख्या में प्रधान परेशान रहे।

पंचायतों का कार्यकाल खत्म होने के आखिरी तीन-चार दिनों में पंचायत के खातों से प्रधानों ने कितना फंड निकाला और कितना बचा रह गया, इसका वास्तविक आंकड़ा अब 26 दिसंबर के बाद ही पता चलेगा। डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर ने बताया कि सर्वर खराब होने से बैलेंस शीट नहीं निकल पा रही है। एक अनुमान के मुताबिक राज्य वित्त और ग्राम निधि-6 के खातों में करीब 30 से 40 करोड़ रुपये बचे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर की करीब 58 हजार पंचायतों के प्रधान एक साथ, भुगतान के लिए लगे थे जिसकी वजह से लोड बढ़ने से पीएफएमएस का सर्वर डाउन हो गया था और भुगतान या कोई अन्य काम नहीं हो पा रहा था। 
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