Gupt Navratri: जानिए कब शुरू हो रही है गुप्त नवरात्रि, मां के इन स्वरूपों की होगी पूजा-अर्चना
आषाढ़ मास के शुक्ल प्रतिपदा और माघ के शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रों की शुरुआत होती है। इस नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा गया कि इसमे साधक बाह्य रूप से ज्यादा प्रदर्शन न करके अपने आवास या शक्तिपीठों पर जाकर गुप्त रूप से साधनाएं करते है।
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गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 11 जुलाई रविवार से हो रही है जो 18 जुलाई को समाप्त होगी। वाराणसी से प्रकाशित पंचांग के अनुसार इसमें पंचमी तिथि का विलय 14 जुलाई को होने के कारण यह नवरात्रि इस बार आठ ही दिन का रहेगा।
पंडित शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि आश्विन मास में शारदीय और चैत्र में वासंतिक नवरात्रि होते है। इसके अतिरिक्त आषाढ़ मास के शुक्ल प्रतिपदा और माघ के शुक्ल प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रों की शुरुआत होती है। इस नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि इसलिए कहा गया कि इसमे साधक बाह्य रूप से ज्यादा प्रदर्शन न करके अपने आवास या शक्तिपीठों पर जाकर गुप्त रूप से साधनाएं करते है। कहा जाता है कि जितना ही अंतर्मुखी होकर पूजा संपन्न की जाती है। उसका फल उतना ही गुणित (कई गुना) होता है।
इनकी होती है आराधना
पंडित अवधेश पांडेय के अुनसार गुप्त नवरात्रि के दौरान साधक 10 महाविद्या की तंत्र साधना के लिए मां काली, मां तारा देवी, मां त्रिपुर-सुंदरी, मां भुवनेश्वरी देवी, माता छिन्नमस्ता, मां त्रिपुरी भैरवी, मां धूमावती, मां मांतगी, मां कमला, माता बग्लामुखी की आराधना करते हैं।
गुप्त नवरात्रि में ऐसे करें पूजन
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के दौरान अन्य नवरात्रि की तरह ही पूजा करनी चाहिए। नौ दिनों के उपवास का संकल्प लेते हुए प्रतिप्रदा के दिन घटस्थापना करनी चाहिए। घटस्थापना के बाद प्रतिदिन सुबह और शाम के समय मां भगवती की पूजा करते हुए मंत्रों की साधना करनी चाहिए।
इसके अलावा दुर्गा सप्तसती का पाठ अवश्य करें। नवमी के दिन व्रत की पूर्णाहुति के पश्चात कन्या पूजन करें। दशमी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण करें।