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Exclusive: ऑनलाइन कराएं एफआईआर, पुलिस नहीं कर पाएगी आनाकानी
Sun, 29 Nov 2020 03:05 PM IST
vivek shukla
शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 29 Nov 2020 03:05 PM IST
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Online FIR
- फोटो : अमर उजाला।
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आप किसी अपराध के शिकार हुए हैं और पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही है तो परेशान न हों। आप ऑनलाइन एफआईआर करा सकते हैं। ऐसा करने से एफआईआर की जानकारी सीधे पुलिस के आला अफसरों तक जाएगी। फिर थाना या चौकी पुलिस ज्यादा तेजी से कार्रवाई करेगी।
इसका ताजा उदाहरण गीडा थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां शादी समारोह में गए एक युवक को गोली मार दी गई थी। पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी करने लगी तो ऑनलाइन ही एफआईआर दर्ज करा दी गई। इस प्रक्रिया में थाना पुलिस का सहयोग नहीं लेना पड़ा। वहीं तहरीर में भी किसी तरह का बदलाव संभव नहीं था। नतीजतन, बिना पैरवी के ही अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हो गया। अब पुलिस विवेचना करके आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
केस एक
गीडा इलाके के जिगिना गांव के एक मैरिज लॉन में सिकरीगंज के महुई निवासी राणा प्रताप सिंह को गोली मारी गई थी। गोली गले में फंसी थी लेकिन पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। तहरीर देने के बाद भी केस न दर्ज होने पर राणा की पत्नी ने ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई। उन्हें न सिर्फ एफआईआर की कॉपी मिल गई बल्कि पुलिस ने इस प्रकरण में कार्रवाई भी शुरू कर दी। आरोप था कि थाने पर तहरीर देने पर पुलिस ने केस दर्ज करने की जगह इलाज कराने की सलाह देकर वापस भेज दिया था।
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केस दो
कुशीनगर के तरकुलहा थाना क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे की मदद से कॉलेज की एक छात्रा का अश्लील वीडियो बनाकर कुछ लोगों ने वायरल किया था। विद्यालय के एक कमरे में एक युवक के साथ मौजूद छात्रा का यह वीडियो फरवरी में वायरल हुआ था। प्रबंधक ने थाने पर संपर्क किया तो केस दर्ज करने में आनाकानी की गई। 6 मई 2020 को छात्रा ने ऑनलाइन केस दर्ज कराया। ऑनलाइन केस होने पर अफसरों को भी इसकी जानकारी हो गई और तत्काल पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।
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इसका ताजा उदाहरण गीडा थाना क्षेत्र में सामने आया है। यहां शादी समारोह में गए एक युवक को गोली मार दी गई थी। पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी करने लगी तो ऑनलाइन ही एफआईआर दर्ज करा दी गई। इस प्रक्रिया में थाना पुलिस का सहयोग नहीं लेना पड़ा। वहीं तहरीर में भी किसी तरह का बदलाव संभव नहीं था। नतीजतन, बिना पैरवी के ही अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज हो गया। अब पुलिस विवेचना करके आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
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केस एक
गीडा इलाके के जिगिना गांव के एक मैरिज लॉन में सिकरीगंज के महुई निवासी राणा प्रताप सिंह को गोली मारी गई थी। गोली गले में फंसी थी लेकिन पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी। तहरीर देने के बाद भी केस न दर्ज होने पर राणा की पत्नी ने ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराई। उन्हें न सिर्फ एफआईआर की कॉपी मिल गई बल्कि पुलिस ने इस प्रकरण में कार्रवाई भी शुरू कर दी। आरोप था कि थाने पर तहरीर देने पर पुलिस ने केस दर्ज करने की जगह इलाज कराने की सलाह देकर वापस भेज दिया था।
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केस दो
कुशीनगर के तरकुलहा थाना क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे की मदद से कॉलेज की एक छात्रा का अश्लील वीडियो बनाकर कुछ लोगों ने वायरल किया था। विद्यालय के एक कमरे में एक युवक के साथ मौजूद छात्रा का यह वीडियो फरवरी में वायरल हुआ था। प्रबंधक ने थाने पर संपर्क किया तो केस दर्ज करने में आनाकानी की गई। 6 मई 2020 को छात्रा ने ऑनलाइन केस दर्ज कराया। ऑनलाइन केस होने पर अफसरों को भी इसकी जानकारी हो गई और तत्काल पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी।
ऐसे डाउनलोड करें एप
गूगल प्ले स्टोर या एप्पल के एप स्टोर से यूपी कॉप एप को डाउनलोड कर सकते हैं। इसमें अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर दर्ज कर पंजीकरण करना होगा, फिर अपनी आवश्यकता के अनुसार संबंधित अपराध या जानकारी का विकल्प चुनना होगा।
नामजद छोड़ हर मामला होगा दर्ज
एप की मदद से लूट, चोरी, मारपीट, भूमि विवाद समेत सभी मामले दर्ज कराए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति को नामजद करने पर इस एप से एफआईआर दर्ज नहीं होगी। पुलिस का कहना है कि नामजदगी का विकल्प मिला तो ढेरों लोगों को बेवजह फंसाया जाएगा। जब पुलिस को तहरीर मिलती है तो वह छानबीन करके ही नामजद एफआईआर दर्ज करती है। हालांकि गुमशुदगी, साइबर अपराध सहित कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें नामजदगी भी हो सकती है।
तीन तलाक के मामले में भी दर्ज हो सकता है केस
तीन तलाक के मामले में भी ऑनलाइन एफआईआर कराई जा सकती है। इसके लिए सिस्टम को करीब एक साल पहले ही अपडेट कर दिया गया है। इसका मकसद मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को सहूलियत देना है। वह बिना थाने जाए भी एफआईआर कर सकती हैं।
नामजद छोड़ हर मामला होगा दर्ज
एप की मदद से लूट, चोरी, मारपीट, भूमि विवाद समेत सभी मामले दर्ज कराए जा सकते हैं। किसी व्यक्ति को नामजद करने पर इस एप से एफआईआर दर्ज नहीं होगी। पुलिस का कहना है कि नामजदगी का विकल्प मिला तो ढेरों लोगों को बेवजह फंसाया जाएगा। जब पुलिस को तहरीर मिलती है तो वह छानबीन करके ही नामजद एफआईआर दर्ज करती है। हालांकि गुमशुदगी, साइबर अपराध सहित कुछ मामले ऐसे हैं, जिनमें नामजदगी भी हो सकती है।
तीन तलाक के मामले में भी दर्ज हो सकता है केस
तीन तलाक के मामले में भी ऑनलाइन एफआईआर कराई जा सकती है। इसके लिए सिस्टम को करीब एक साल पहले ही अपडेट कर दिया गया है। इसका मकसद मुस्लिम समुदाय की महिलाओं को सहूलियत देना है। वह बिना थाने जाए भी एफआईआर कर सकती हैं।
वेबसाइट के माध्यम से ऐसे दर्ज कराएं एफआईआर
यूपी पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट uppolice.gov.in पर लॉग इन करें। होम पेज पर ऊपर ही संपर्क सूत्र में 'हम तक पहुंचें' का विकल्प नजर आएगा। इस लिंक पर जाने पर जो पेज खुलेगा उसपर सीसीटीएनएस पोर्टल पर शिकायत/ ई एफआईआर का विकल्प मिलेगा। इस लिंक पर जाकर पूरा ब्योरा भरना होगा। पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मिले ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) को दर्ज करने से एफआईआर हो जाएगी।
ये सुविधाएं मिलती हैं
एडीजी जोन दावा शेरपा ने बताया कि ऑनलाइन एफआईआर को बढ़ावा दिया जा रहा है। थानों के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी किया गया है। एप की मदद से एफआईआर कराने का चलन बढ़ रहा है। इसकी निगरानी भी की जा रही है।
ये सुविधाएं मिलती हैं
- एफआईआर दर्ज करा सकते हैं
- दर्ज एफआईआर की कॉपी पाई जा सकती है
- पुलिस थाने का लोकेशन और अपना थाना क्षेत्र जान सकते हैं
- सड़क हादसे वाले जगह की जानकारी ली जा सकती है
- बाइक या कार चोरी के बरामद होने की जानकारी मिल सकेगी
- चरित्र, कर्मचारी, किराएदार का सत्यापन करा सकेंगे
- प्रदर्शन, शादी या फिर अन्य किसी की अनुमति ले सकते हैं
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट पा सकेंगे, गिरफ्तार आरोपी की भी होगी जानकारी
एडीजी जोन दावा शेरपा ने बताया कि ऑनलाइन एफआईआर को बढ़ावा दिया जा रहा है। थानों के माध्यम से प्रचार-प्रसार भी किया गया है। एप की मदद से एफआईआर कराने का चलन बढ़ रहा है। इसकी निगरानी भी की जा रही है।