लुटेरों को भगाने के लिए मुगल बादशाह जहांगीर ने इस शख्स को भेजा था मगहर, इसी के नाम पर बना है 'खलीलाबाद शहर'
- आज भी खलीलुर्रहमान के किले का मुख्य गुबंद है मौजूद
- किले में अब कोतवाली पुलिस का बन गया है भवन
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संतकबीरनगर वर्ष 1754 में मुगलकाल के समय में बस्ती जिले के मगहर क्षेत्र में लुटेरों का खास प्रभाव था। दिन में भी यात्रियों को लुटेरे लूट लेते थे। लोगों की गुहार सुन मुगल बादशाह जहांगीर ने अपने सहयोगी बहराईच के खलीलुर्रहमान को लुटेरों को भगाने के लिए मगहर भेजा। जिसके बाद खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद में ठिकाना बनाया और लुटेरों को जिले से बाहर भगाया।
बताया जाता है कि मुगलकाल में बस्ती जिले का मगहर मुख्य केंद्र था। यही से पूरे जिले का संचालन होता था। चूंकि मगहर मुख्य मार्ग पर था। इस वजह से लुटेरे दिन में भी यात्रियों को लूटते थे। जिसकी वजह से कोई इस रास्ते से जाने को तैयार नहीं होता था।
वर्ष 1754 में बंगाल जाते हुए गोरखपुर में मुगल बादशाह जहांगीर का खेमा आया था। वहीं तमाम यात्रियों ने मुगल बादशाह से लुटेरों का भगाने की गुहार लगाई। जिसके बाद मुगल बादशाह ने अपने सहयोगी बहराईच निवासी खलीलुर्रहमान को लुटेरों को भगाने के लिए मगहर भेजा।
संरक्षण की है जरूरत
खलीलुर्रहमान ने खलीलाबाद में अपना ठिकाना बनाया और एक किले से संचालन शुरू किया। जिसके बाद उन्होंने कुछ ही दिन बाद लुटेरों को जिले से बाहर कर दिया। तभी से खलीलुर्रहमान के नाम पर जिले का नाम खलीलाबाद रखा गया।
किले का मुख्य गुबंद काफी भव्य है। कहा जाता है कि समय माता को भी खलीलुर्रहमान ने बहराईच से लाए थे और अपने किले के बगल में स्थापित कराया था। अवकाश प्राप्त प्रधानाचार्य हीरालाल त्रिपाठी, व्यापारी अमरनाथ रूंगटा, शिव कुमार गुप्त ने बताया कि खलीलुर्रहमान के नाम पर जिले का नाम खलीलाबाद पड़ा था। यहां का किला आज भी ऐतिहासिक है। बस इसके संरक्षण की जरूरत है।