{"_id":"5ed1e1518ebc3e90941e57a4","slug":"know-about-all-sun-temple-in-kushinagar-special-story","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"गुप्त कालीन है यह सूर्य मंदिर में स्थापित प्रतिमा, मिलते ही हो गई थी चोरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुप्त कालीन है यह सूर्य मंदिर में स्थापित प्रतिमा, मिलते ही हो गई थी चोरी
Sat, 30 May 2020 03:38 PM IST
vivek shukla
सुनील कुमार सुमन, तुर्कपट्टी (कुशीनगर)।
सुनील कुमार सुमन, तुर्कपट्टी (कुशीनगर)।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 30 May 2020 03:38 PM IST
विज्ञापन
Kushinagar news
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कुशीनगर तुर्कपट्टी स्थित सूर्यमंदिर में स्थापित प्रतिमा गुप्तकालीन है। नीलम धातु से निर्मित इस प्रतिमा के दर्शन करने के लिए भारत ही नहीं पड़ोसी देश नेपाल ,म्यांमार और श्रीलंका से भी पर्यटक आते हैं। प्रत्येक वर्ष नवंबर में आयोजित होने वाला सूर्य महोत्सव लोगों के आकर्षण का केंद्र होता है।
विज्ञापन
तुर्कपट्टी महुअवा गांव निवासी विश्वनाथ शर्मा ने 30 जुलाई 1981 की रात में स्वप्न देखा कि घर के बगल की जमीन में सूर्य प्रतिमा है। अगले दिन सुबह उन्होंने यह बात गांव के केडी शाही व मथुरा शाही को बताई।
विज्ञापन
स्वप्न में बताई गई जगह पर खुदाई शुरू कराई गई तो वहां विभिन्न देवी देवताओं के मूर्तियों के साथ सात घोड़ों पर सवार,चतुर्भुज रूप में एक सूर्य प्रतिमा मिली। खबर पूरे देश में फैली तो तत्कालीन इतिहासकार चन्द्रमौलि शुक्ल, शैल चतुर्वेदी, पीके लहरी, महावीर प्रसाद कंदोई सहित भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण टीम भी पहुंच गई।
विज्ञापन
खिचड़ी मेला होता है खास
इतिहासकारों ने प्रतिमा को गुप्तकालीन और बेशकीमती बताया। भारतीय पुरातत्व विभाग ने पूरे क्षेत्र को ऐतिहासिक महत्व बताते हुए महात्मा बुद्ध के समकालीन उच्च संस्कृति का केंद्र होने का दावा किया।
जुलाई 1998 में यह कीमती प्रतिमा चोरी हो गई। श्रद्धालुओं समेत पूरे देशों में मूर्ति के बरामद करने की मांग उठने लगी। दो वर्ष के अथक परिश्रम के बाद मूर्ति बरामद हो सकी। आज यहां भव्य मंदिर बना हुआ है, यहां विभिन्न देश के श्रद्धालु आते हैं।
खासकर प्रत्येक रविवार को सूर्य उपासना व्यापक स्तर पर लोग करते हैं। यहां का खिचड़ी मेला भी आकर्षण का केंद्र है।
जुलाई 1998 में यह कीमती प्रतिमा चोरी हो गई। श्रद्धालुओं समेत पूरे देशों में मूर्ति के बरामद करने की मांग उठने लगी। दो वर्ष के अथक परिश्रम के बाद मूर्ति बरामद हो सकी। आज यहां भव्य मंदिर बना हुआ है, यहां विभिन्न देश के श्रद्धालु आते हैं।
खासकर प्रत्येक रविवार को सूर्य उपासना व्यापक स्तर पर लोग करते हैं। यहां का खिचड़ी मेला भी आकर्षण का केंद्र है।