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Gorakhpur News: पुत्र वियोग में राजा दशरथ ने त्यागे प्राण

Fri, 16 Oct 2026 03:24 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 16 Oct 2026 03:24 AM IST
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King Dasharatha gave up his life in grief over the separation from his son.
गोरखपुर। श्री रामलीला समिति आर्य नगर के 109वें रामलीला महोत्सव के छठे दिन बृहस्पतिवार को केवट संवाद और दशरथ मरण की मार्मिक लीला का मंचन किया गया। वृंदावन से आए कलाकारों ने भगवान श्रीराम के प्रति केवट के अनन्य प्रेम और पुत्र वियोग में राजा दशरथ के प्राण त्यागने के प्रसंग को जीवंत कर दिया। मंचन के दौरान पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो उठे।
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लीला में दिखाया गया कि वन गमन के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण गंगा तट पर पहुंचते हैं। नदी पार कराने के लिए केवट से आग्रह किया जाता है तो वह कहता है कि प्रभु के चरणों के स्पर्श से पत्थर भी नारी बन गया था। ऐसे में यदि उनकी नाव भी नारी बन गई तो उसके परिवार का भरण-पोषण कैसे होगा। इसलिए वह पहले प्रभु के चरण पखारेगा, फिर उन्हें नाव पर बैठाएगा।
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केवट के निश्छल प्रेम को देखकर भगवान श्रीराम उसकी बात स्वीकार कर लेते हैं। केवट उनके चरण पखारता है और चरणामृत ग्रहण करने के बाद श्रीराम, सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराता है। नदी के दूसरी ओर पहुंचने पर श्रीराम केवट को गले लगाते हैं। इस प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति और समर्पण का संदेश दिया।
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इसके बाद अयोध्या में राजा दशरथ के पुत्र वियोग का प्रसंग दिखाया गया। युवावस्था में शिकार के दौरान शब्दभेदी बाण से श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई थी। श्रवण के अंधे माता-पिता ने पुत्र की मृत्यु से दुखी होकर राजा दशरथ को पुत्र वियोग में प्राण त्यागने का श्राप दिया था। राम के वन गमन के बाद दशरथ को श्राप याद आता है। वह ''''राम-राम'''' पुकारते हुए प्राण त्याग देते हैं। इस मार्मिक दृश्य को देखकर दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

आरती में डॉ. सुरेश, डॉ. शिवेंद्र त्रिपाठी, डॉ. दिनेश शर्मा, शिव जी सिंह, समिति अध्यक्ष पुष्प दंत जैन, कोषाध्यक्ष मनीष अग्रवाल, महामंत्री दीप अग्रवाल, बृजेश मणि मिश्रा, संतोष राजभर, विकास जालान, जयदित सिंह, केवी अग्रवाल, भागवत दास अग्रवाल, नवोदित त्रिपाठी और संजय अग्रवाल सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।
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