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Kharmas: खरमास 16 दिसंबर से, बंद हो जाएंगे मांगलिक कार्य
Wed, 01 Dec 2021 12:01 AM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 01 Dec 2021 12:01 AM IST
सार
पंडित शरदचंद्र मिश्र ने बताया कि नवग्रहों के स्वामी सूर्य जब-जब देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं, तब-तब खरमास होता है। इसमें कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
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खरमास 2021
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
16 दिसंबर को सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करते ही खरमास शुरू हो जाएगा। इसके साथ ही एक माह के लिए मांगलिक कार्य बंद हो जाएंगे। अगले साल 14 जनवरी को खरमास खत्म होगा और फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे।
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पंडित शरदचंद्र मिश्र ने बताया कि नवग्रहों के स्वामी सूर्य जब-जब देवताओं के गुरु बृहस्पति की राशि धनु और मीन में गोचर करते हैं, तब-तब खरमास होता है। इसमें कोई शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। हालांकि खरमास में पूजा-पाठ, पुण्य कार्य जैसे दान इत्यादि धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में धार्मिक कार्य और पुण्य करने से समस्त कठिनाइयां समाप्त होती हैं और सुख-शांति की वृद्धि होती है।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, वर्ष में दो बार जब सूर्य धनु और मीन राशि में आते हैं तब खरमास लगता है। सूर्य किसी भी राशि में एक महीने रहते हैं। धनु राशि में प्रवेश के समय बृहस्पति का भी तेज कमजोर हो जाता है और गुरु के स्वभाव में उग्रता आ जाती है। सूर्य जब भी बृहस्पति की राशि में जाता है तो वह प्राणिमात्र के लिए उत्तम नहीं रहता है।
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किसी भी शुभ कार्य को करने के लिए त्रिबल की आवश्यकता होती है। त्रिबल अर्थात सूर्य, चंद्रमा व बृहस्पति का बल। जब तीनों ग्रह उत्तम स्थिति में रहते हैं, तभी शुभ कार्य किए जाते हैं। इनमें से यदि कोई भी क्षीण या निस्तेज होता है, अस्त होता अथवा पीड़ित होता है तो शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। खरमास में दो ग्रहों का बल तो बना रहता है लेकिन एक ग्रह कमजोर हो जाता है।