गोरखपुर: कम वजन वाले बच्चों की सेहत बना रहा कंगारू मदर केयर, मां को दिया जा रहा केएमसी का प्रशिक्षण
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि अगर नवजात शिशु का तापमान 36.5 से 37.5 डिग्री के बीच नहीं है और यह घट रहा है तो चिंता का विषय है। ऐसे में मां को केएमसी के बारे में सिखाया जाता है। लेबर रूम में ही केएमसी कार्नर बनाया गया है, जहां मां को प्रशिक्षित किया जाता है।
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कम वजन और हाइपोथर्मिया से पीड़ित बच्चों की सेहत केएमसी (कंगारू मदर केयर) के जरिये ठीक की जा रही है। इसे लेकर महिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली माताओं को डॉक्टरों और स्टॉफ नर्सों की टीम प्रशिक्षण दे रही है।
जानकारी के मुताबिक, महिला अस्पताल में सुनीता ने 1,700 ग्राम के एक बच्चे को जन्म दिया। बच्चे को दूध पीने में भी दिक्कत थी। इस बीच स्टाफ नर्स नेस्किन से स्किन टच देने की ट्रेनिंग दी। उन्हें बताया गया कि किस तरह बच्चे को सीने से लगाना है और स्किन टच देना। इसका असर यह हुआ कि बच्चे का वजन बढ़कर एक सप्ताह में 2,100 ग्राम हो गया। अब बच्चा पूरी तरह से स्वस्थ है। इसी क्रम में, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अनीता ने बच्चे को जन्म दिया। बच्चे का वजन एक किलो 970 ग्राम था। डॉक्टरों की टीम ने केएमसी का तरीका बताया।
एक सप्ताह में बच्चे का वजन 2,300 ग्राम से अधिक हो गया। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागध्यक्ष डॉ वाणी आदित्य ने बताया कि केएमसी हर मां और बच्चे के लिए जरूरी है। हर मां को इसकी ट्रेनिंग दी जाती है। कई बार ऐसा होता है कि बच्चा दूध नहीं पी पाता है और मां को भी दूध नहीं होता है, केएमसी के जरिये बच्चे को दूध पिलाया जाता है। इस प्रक्रिया में बच्चे का वजन भी तेजी से बढ़ता है।
इतना रहे तापमान
डॉ. वाणी आदित्य ने बताया कि अगर नवजात शिशु का तापमान 36.5 से 37.5 डिग्री के बीच नहीं है और यह घट रहा है तो चिंता का विषय है। ऐसे में मां को केएमसी के बारे में सिखाया जाता है। लेबर रूम में ही केएमसी कार्नर बनाया गया है, जहां मां को प्रशिक्षित किया जाता है। घर के किसी अन्य सक्षम अभिभावक को भी प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि बच्चे को केएमसी मिलती रहे।
सीएमओ डॉ आशुतोष कुमाद दुबे ने बताया कि जिले में सक्रिय 72 प्रसव केंद्रों में से 52 पर केएमसी कार्नर बनाए गए गए हैं। इसके अलावा महिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भी केएमसी कॉर्नर बनाए गए हैं, जहां पर मां को इसकी ट्रेनिंग दी जा रही है। इसके अलावा नवजात शिशुओं के माताओं को घर-घर भ्रमण के दौरान आशा कार्यकर्ता केएमसी के बारे में बता रही है।