गोरखपुर: डीएनए जांच के फेर में फंस गया इंसाफ, सवालों के घेरे में आई पुलिस की सुस्त कार्रवाई
एडीजी अखिल कुमार ने कहा कि पुरानी घटनाओं का पर्दाफाश हो, इसके लिए पुलिस को निर्देशित किया गया है। डीएनए जांच कराने के लिए एसपी को पत्र भेजा गया था। इसे पुलिस कराएगी।
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गोरखपुर शहर की दो बड़ी घटनाओं में इंसाफ डीएनए जांच के फेर में फंस कर रह गया है। बीते दिनों में कोतवाली इलाके में शहाना की मौत में फंसे दरोगा को पुलिस ने खुदकुशी को उकसाने का आरोपित बनाकर जेल तो भेज दिया, लेकिन डीएनए जांच के चक्कर में शहाना के बेटे को अब तक इंसाफ नहीं मिल सका।
मसलन, उसका पिता कौन है? इसके लिए आरोपित दरोगा राजेंद्र सिंह की डीएनए जांच होनी थी, जिसके लिए आरोपित से आज तक नमूने तक नहीं लिए जा सके। कुछ इसी तरह गोरखनाथ इलाके में पानी की टंकी में एक युवक की लाश मिलने के मामले में डीएनए जांच के फेर में कुछ नहीं हो पा रहा है। डीएनए मिलान हो तो पता चले कि वह युवक कौन था? युवक की पहचान के बाद ही तफ्तीश आगे बढ़नी मुमकिन है।
शहाना की मौत का राज खुला पर बेटे को नहीं मिला इंसाफ
15 अक्तूबर 2021 को कोतवाली इलाके के बक्शीपुर में किराए के मकान में शहाना की फंदे से लटकी लाश मिली थी। जांच में पता चला था कि बेलीपार के भीटी गांव निवासी शहाना की दरोगा राजेंद्र सिंह से गहरी दोस्ती थी। दोनों साथ में ही किराए के मकान में रहते थे। इसकी पुष्टि मकान मालिक ने भी की थी। घरवालों का दावा है कि शहाना के चार साल के बेटे का पिता भी आरोपित दरोगा राजेंद्र सिंह ही है।
इसके बाद पुलिस ने राजेंद्र सिंह को खुदकुशी को उकसाने का केस दर्ज कर जेल भेजा था। वर्तमान में वह जेल से बाहर है, लेकिन पुलिस उसका डीएनए टेस्ट नहीं करा पाई है, ताकि यह पुष्ट हो सके कि आखिर बच्चा किसका है। शहाना की मां गरीबी के बीच जैसे-तैसे बच्चे को पाल रहीं हैं। कोतवाली पुलिस का कहना है कि दरोगा से पत्राचार किया गया है और इसे नियम के दायरे में कराया जाएगा।
पानी के टंकी में मिले युवक की पहचान तक नहीं हुई
29 अगस्त 2021 को गोरखनाथ इलाके के हुमायूंपुर हड़हवा फाटक के पास रिटायर्ड कृषि इंस्पेक्टर सुरेंद्र सिंह के मकान की छत पर स्थित पानी की टंकी में एक युवक की लाश मिली थी। पोस्टमार्टम में मौत की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई थी और विसरा सुरक्षित कर लिया गया था। मृतक के हाथ पर विशाल नाम गोदा हुआ था। जांच में पता चला था कि पास का ही रहने वाला विशाल नाम का एक युवक लापता है। उसके घर से गमछे का आधा टुकड़ा मिला था, इसी जैसे गमछे का आधा हिस्सा शव पर मिला था।
शव, लापता विशाल का है या नहीं, इसके लिए डीएनए जांच कराने की बात कही गई, लेकिन लापता विशाल की मां इसके लिए तैयार नहीं हुई और पुलिस चुपचाप बैठ गई। आज तक ना तो लापता विशाल को ही पुलिस खोज पाई और ना ही टंकी में मृत मिले युवक की ही शिनाख्त हो पाई। यह केस पूरी तरह से फाइलों में अब बंद हो चुका है।
एडीजी अखिल कुमार ने कहा कि पुरानी घटनाओं का पर्दाफाश हो, इसके लिए पुलिस को निर्देशित किया गया है। डीएनए जांच कराने के लिए एसपी को पत्र भेजा गया था। इसे पुलिस कराएगी।