जंगल कौड़िया-सोनौली रिंग रोड मामला: DM ने मुआवजे को लेकर किसानों का सुना दुखड़ा, बोले- अब नहीं होगा गोलमाल
किसान आलोक मल्ल ने कहा कि डीएम के सामने सभी बातें रखी गई हैं। उनसे मांग की गई है कि एक पंचायत बुलाई जाए। जिसमें सभी संबंधित विभाग के अधिकारी रहें। ताकि टालने वाले प्रक्रिया न हो। हम लोग भी चाहते हैं रिंग रोड बने। लेकिन, हमारे हित की भी चिंता प्रशासन को करनी होगी। डीएम ने रविवार को पंचायत कराने का आश्वासन दिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
साहब, अधिकारियों ने मामले को बहुत पेचीदा बना दिया है। पहले मुआवजे की राशि सर्किल रेट से तय करके चार गुना रकम खाते में भेज दी। बाद में संशोधन कर बताया कि आपकी जमीन तो शहरी क्षेत्र में है और मुआवजा दो गुना ही मिलेगा। इसके बाद 323 किसानों के खातों के संचालन पर रोक लगा दी गई है।
बताइए, पैसों के अभाव में हमारे तो सारे काम भी रुक गए हैं। एक साथ सभी विभाग के लोग नहीं आते हैं। सब गोलमाल चल रहा है। यह कहना था किसानों का...। किसानों का दुखड़ा सुनने के बाद डीएम कृष्णा करूणेश ने कहा कि बडे़ ही सलीके से आप लोगों ने समझाया। अब कोई गोलमाल नहीं होगा।
बोले, हम आपके साथ हैं। नियम के मुताबिक आपके लिए जो बेहतर होगा करेंगे। औसत मुआवजे की दर तय की जाएगी। जिन लोगों के पैसे खाते में नहीं गए हैं, उनका भुगतान तीन महीने में हो जाएगा। रविवार को पीपीगंज में सभी विभागों के एक-एक अधिकारी जाएंगे, एक मंच पर समझौते की बात होगी। डीएम की बातों पर सभी ने हामी भरी और फिर रविवार को धरना-प्रदर्शन न करने का एलान किया।
बृहस्पतिवार की सुबह 10.45 बजे ही मुआवजे पर वार्ता के लिए 100 से ज्यादा किसान डीएम कार्यालय पहुंच गए। पेड़ के नीचे 15 किसान खड़े थे। उन्होंने बताया कि पीपीगंज से आए हैं। आज हम लोग हर हाल में डीएम साहब से मिलकर ही जाएंगे। चाहे जितना भी इंतजार करना पड़े। तभी पीपीगंज के आलोक मल्ल आ गए। वह सबको पर्यटन कार्यालय में ले गए।
इसे भी पढ़ें: प्रमुख सचिव गृह ने वीडियो कांफ्रेंसिंग कर सुरक्षा बढ़ाने के दिए निर्देश, जीवा हत्याकांड के बाद अलर्ट
डीएम के सामने रखी मांग
वहां पहले से ही रामानंद, रजत, सूर्यदेव पाठक, कपिल देव सहित अन्य 25 लोग मौजूद थे। उनके बीच आपस में जंगल कौड़ियां-सोनौली बाईपास रिंग रोड के निर्माण को लेकर बातचीत होने लगी। यह सब चल ही रहा था कि साढ़े 11 बजे डीएम की गाड़ी परिसर में दाखिल हुई। सभी लोग डीएम से मिलने पहुंच गए।
भीड़ को देखकर कर्मचारियों ने कहा कि सिर्फ पांच लोग ही जाएंगे। आलोक मल्ल, सूर्यदेव पाठक, कपिल देव पाठक, संजय कुमार कन्नौजिया, विमल जायसवाल डीएम के कमरे में गए। बाद में रामानंद मद्धेशिया और रजत गुप्ता भी पहुंच गए। वहां पहले से मुख्य राजस्व अधिकारी और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी का कार्यभार देख रहे सुशील कुमार भी बैठे थे।
डीएम के सामने आलोक मल्ल ने बात शुरू की। कहा कि किसानों को मुआवजा बढ़ाकर दिया जाए। पूर्व में ग्रामीण के दर से चार गुना पैसा मिला था। उसे अब शहरी बताकर सिर्फ दोगुना कर दिया गया है। इससे जिनके खाते में अधिक रकम चली गई है। उससे वापस लेने की बात कही जा रही है।
इसे भी पढ़ें: पीड़ित को मिला न्याय: खत्म हुआ माफिया विनोद का खौफ, पुलिस सुरक्षा में पूर्व अधिवक्ता ने शुरू कराया जमीन पर काम
इस पर रोक लगाई जाए। इसके बाद रामानंद मद्धेशिया ने पीपीगंज के पूरब से सरहरी जाने वाली सड़क के आसपास किसानों की जमीन का कृषि भूमि के मुआवजा देने पर आपत्ति जताते हुए जांच कराने की मांग की। बताया कि पिच रोड किनारे का पैसा कम दिया जा रहा है।
विमल जायसवाल ने सभी मामलों को आर्बिटेशन में जल्द निपटाने की बात कही। कहा कि फिर एनएचएआई, एसएलओ और राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ किसानों की बैठक रविवार को कराई जाए। 15 मिनट तक उनकी बातें सुनने के बाद डीएम ने एक-एक बिंदु पर उनसे बात की। कहा कि औसत मुआवजा की दर तय की जाएगी।
आर्बिट्रेशन के जरिए जो लोग अपना साक्ष्य रखेंगे। उनको सर्किल रेट से जो भी मुआवजा बनेगा, उसे तैयार कराकर एनएचएआई को भेज दिया जाएगा। तीन माह के भीतर रकम संबंधित किसान के खाते में आ जाएगी। इस आश्वासन के बाद किसान संतुष्ट होकर रवाना हो गए।
मुआवजे के लिए एक मापदंड रखें
किसान कपिल देव पाठक ने कहा कि हम लोगों ने शहर के सर्किल रेट से मुआवजे की रकम को देने की मांग रखी है। अगर ऐसा नहीं होगा तो हमें तो दोहरा नुकसान होगा। गांव के सर्किल रेट से मुआवजा तय करने के बाद चार गुना की जगह दो गुना दे रहे हैं। कोई एक मापदंड होना चाहिए।
हर जगह का एक रेट कैसे
किसान विभूति चौहान ने कहा कि हर ग्राम सभा की अलग-अलग दर तय है। मुआवजे की रकम में काफी अंतर होने से लोग असंतुष्ट हैं। इसका निस्तारण किया जाना जरूरी है। अब खेती की जमीन और सड़क के किनारे की जमीन का रेट एक कैसे हो सकता है।
इसे भी पढ़ें: मां की शिकायत पर FIR: अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किया दुष्कर्म, आरोपी की तलाश शुरू
पंचायत की मांग सुन ली
किसान आलोक मल्ल ने कहा कि डीएम के सामने सभी बातें रखी गई हैं। उनसे मांग की गई है कि एक पंचायत बुलाई जाए। जिसमें सभी संबंधित विभाग के अधिकारी रहें। ताकि टालने वाले प्रक्रिया न हो। हम लोग भी चाहते हैं रिंग रोड बने। लेकिन, हमारे हित की भी चिंता प्रशासन को करनी होगी। डीएम ने रविवार को पंचायत कराने का आश्वासन दिया है।
मुआवजा तय करने में लापरपाही
किसान रामानंद मद्धेशिया ने कहा कि सड़क और खेत के मुआवजे को तय करने में लापरवाही की गई है। 1500 से अधिक किसान प्रभावित हो रहे हैं। जिनके पास कम भूमि है, उनके लिए तो मुआवजा ही सहारा है। इसके अलावा खातों का संचालन बंद किया गया है, रोक तत्काल हटाई जानी चाहिए।
किसान रामनरेश ने कहा कि भूमि अधिग्रहित करने के बाद कम मुआवजा दिया गया। उसमें से आधी रकम भी काट कर खाते पर रोक लगा दी गई है। अब पैसे के अभाव में ना तो खेती हो पा रही है और न ही परिवार का जीवन यापन कर पा रहे हैं।
इसे भी पढ़ें: MMMUT में इसी सत्र से होगी इंटरनेट ऑफ थिंग्स की पढ़ाई, JEE Main के आधार के मिलेगा प्रवेश
स्कूल के फीस भरना मुश्किल
किसान कांति देवी ने कहा कि बैंक के खाते पर रोक लगी है। स्कूल फीस देने समेत अन्य घरेलू काम नहीं हो पा रहे हैं। हमारे खाते के संचालन पर तो रोक हटाएं। मुआवजे की राशि पता नहीं कब तक तय करेंगे, तब तक तो सारे काम अटके पड़े रहेंगे।
इन गांवों के खातों पर लगी है रोक
| गांव | किसानों की संख्या |
| बगहीबारी | 102 |
| साहबगंज | 104 |
| भैयाराम | 22 |
| जंगल बिहूलि | 95 |